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गुरुकुल कांगड़ी में 10वीं पास बने प्रोफेसर!

Sat, 28 Jun 2014 03:58 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sat, 28 Jun 2014 03:58 PM IST
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fraud appointment in gurukul kangri university

देश के प्रतिष्ठित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी और नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद का आरोप लगा है।

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बिना 10वीं-12वीं किए लोग भी यहां प्रोफेसर बन बैठे हैं। 59 अधिकारी-कर्मचारी और शिक्षक ऐसे भी हैं, जिनके 75 रिश्तेदार विवि में नौकरी कर रहे हैं।

हरिद्वार निवासी शिक्षक हरेंद्र सैनी की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में इन बिंदुओं को उठाते हुए जांच पड़ताल की मांग की गई है।

जबरन स्वैच्छिक सेवानिवृत्त दिया

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याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया है कि एक प्रोफेसर के फर्जी प्रमाणपत्रों का सच सामने आने पर उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्त भी कर दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट को ऐसे 59 अधिकारी-कर्मचारी और शिक्षकों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है जिन्होंने 75 रिश्तेदारों को गुरुकुल में नौकरी दिलाई है।

सूची में एक-एक कर्मचारी के चार-चार पारिवारिक सदस्य गुरुकुल के कर्मचारी बताए गए हैं। किसी की पत्नी, किसी का बेटा-बेटी तो किसी के अन्य परिजन गुरुकुल में नौकरी कर रहे हैं।

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बदनाम करने के लिए किया जा रहा

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इतना ही नहीं विवि के एक ऐसे नियम पर भी सवाल उठाए गए हैं जिसमें लिखा गया है कि बिना आवेदन किए भी किसी अभ्यर्थी को साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

जो मामले जनहित याचिका में उठाए गए हैं, यह सभी पूर्व प्रशासन के समय के हैं। हमारे कार्यकाल का इनमें एक भी मामला नहीं है। पुराने मामलों को मौजूदा प्रशासन को बदनाम करने के लिए उठाया जा रहा है। जो नियुक्तियां दशकों पहले हुई हैं उन पर कहने से अब क्या लाभ है।

बिना 10वीं और 12 वीं की परीक्षा पास किए नियुक्ति के जिन मामलों की बात की जा रही है, उनमें उस समय मानकों का पालन जरूर किया गया। भाई-भतीजावाद के आरोप भी सही नहीं हैं। नियुक्ति का मानक योग्यता होता है, यदि कोई योग्य है तो फिर वह किसी का भी रिश्तेदार हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
-प्रो. सुरेंद्र कुमार, कुलपति गुरुकुल कांगड़ी विवि, हरिद्वार।

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