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फटी जींस के बयान पर कायम हूं : पूर्व सीएम ने दोहराई अपनी बात, कहा-फटा कपड़ा हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं

Mon, 16 May 2022 08:18 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 16 May 2022 08:18 AM IST
सार

सिर्फ 114 दिन में ही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की कहानी खत्म हो गई थी। उनकी विदाई की पटकथा उनके विवादित बयानों ने लिख दी थी। कई अवसरों पर सरकार और संगठन पर उनके विवादित बयान भारी पड़ गए। खासकर फटी जींस के बयान पर उन्हें जनता के साथ ही पार्टी के भीतर आलोचनाएं झेलनी पड़ी थी। 

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Former CM Tirath Singh Rawat statement again about woman wearing torn jeans, said- I stand by my point even today
तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फटी जींस बयान पर काफी आलोचना झेलने वाले गढ़वाल सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने पुराने बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि फटा हुआ कपड़ा कभी भी हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है। उन्होंने जींस का विरोध नहीं किया था, बल्कि फटी जींस पर एतराज किया था।
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मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए तीरथ सिंह रावत ने मार्च 2021 में बाल संरक्षण अधिकार आयोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बयान दिया था कि आजकल के बच्चे बाजार में घुटनों पर फटी जींस खरीदने जाते हैं। रविवार को श्रीनगर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे रावत ने एक बार फिर फटी जींस का मसला उठाया।
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उन्होंने कहा कि विदेशी लोग हमारी संस्कृति को अपना रहे हैं और हम पाश्चात्य संस्कृति का अंधा अनुकरण करते हुए फटी जींस पहन रहे हैं। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वह फटी जींस संबंधी अपने पुराने बयान पर कायम हैं। मैं गौरान्वित महसूस करता हूं कि लाखों लोगों ने इसे स्वीकारा है।
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पूरा शरीर ढकना हमारी संस्कृति में है: तीरथ

सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन में संदेश मिले। उन्होंने कहा कि जब हम स्कूल-कॉलेज जाते थे, तो हम भी जींस पहनते थे। यदि कभी घुटना फट गया, तो उस पर पैच लगाते थे। गुरुजी का डर होता था। साथ ही अनुशासन, संस्कार व संस्कृति इसकी इजाजत नहीं देती है, लेकिन आज यह स्थिति है कि जींस फटी नहीं है, तो नौजवान इस पर कैंची चला देते हैं। उन्होंने कहा कि जींस का विरोध नहीं है, बल्कि फटी जींस का विरोध है। फटा कपड़ा हमारी संस्कृति का द्योतक नहीं है। पूरा शरीर ढकना हमारी संस्कृति में है। 

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