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अब उत्तराखंड देगा चीन की घुसपैठ का जवाब

Wed, 16 Jul 2014 10:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 16 Jul 2014 10:24 AM IST
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forest protection act 1980 and china

सीमा पर चीन के बढ़ते दखल का जवाब देने के लिए भारत ने भी राज्यों के हाथ खोल दिए हैं। अब इन इलाकों में सड़क या दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में वन संरक्षण अधिनियम 1980 रोड़ा नहीं बनेगा।

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बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) को दी गई विशेष छूट के आदेश केंद्रीय वन मंत्रालय से उत्तराखंड समेत चार राज्यों को आदेश मिल गए हैं।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से हाल में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम को जारी पत्र में साफ किया गया है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के हवा से 100 किमी दायरे में निर्माण के लिए बीआरओ को मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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रक्षा प्रोजेक्ट में विशेष छूट

forest protection act 1980 and china

मंत्रालय ने सभी प्रस्तावित रक्षा प्रोजेक्ट में विशेष छूट दे दी है। इसमें सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास शामिल है।

मंत्रालय के फॉरेस्ट कंजर्वेशन डिवीजन निदेशक एचसी चौधरी की ओर से चारों राज्यों के प्रमुख वन सचिवों को इस संबंध में आदेश मिल गए हैं।

ऐसे होगा फायदा

forest protection act 1980 and china

1. चीन सीमा पर अपनी ओर रोड नेटवर्क के साथ ही संचार का बड़ा माध्यम तैयार कर चुका है। वहीं, कानूनी पेंचों के चलते भारत इसमें पिछड़ रहा था।

2. सीमा पर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा सकेगा, जिससे लोगों के साथ ही चीन की घुसपैठ की कोशिशों पर भी लगाम लग सकेगी।

3. केंद्र से आए पत्र के मुताबिक अब पांच हेक्टेयर तक के चौड़ीकरण, नवीनीकरण जैसे फॉरेस्ट क्लीयरेंस राज्य स्तर पर ही दिए जाएंगे।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-aftaba@ddn.amarujala.com और इस नंबर-8392922180 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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