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अब डेनमार्क की गन ‘राजा’ के उड़ाएगी होश
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 04 Aug 2015 01:10 PM IST
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डेनमार्क की गन राजा (टाइगर) के होश उड़ाएगी। वन विभाग ने बेहतर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए इन गनों को मंगाया है।
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इन खास ट्रंकोलाइजर गनों के अलावा दूसरे उपकरण भी खरीदे गए हैं। नये उपकरणों के आने के बाद अब वन्य जीवों की सुरक्षा के साथ-साथ राहत एवं बचाव की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकेगा।
तराई के जंगलों में बाघ, हाथी से लेकर दूसरे वन्यजीवों की अच्छी तादाद है। वन विभाग के पास मानव-वन्य जीव संघर्ष या मुश्किल में फंसे बाघ, हाथी को रेस्क्यू करने के लिए कोई भी आधुनिक उपकरण नहीं था। इससे कई वन्य जीव बेमौत मारे गए।
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मामले में शिकायत के बाद वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने जांच की। किरकिरी के बाद वन महकमे ने सभी प्रभागों में रेस्क्यू टीम बनाने और उपकरण देने का फैसला किया। इसी क्रम में गौला कापर्स से तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, रामनगर, तराई पश्चिम और हल्द्वानी वन प्रभाग के लिए जहां पर ज्यादा दबाव है, वहां के जंगलों के लिए आधुनिक हथियार, उपकरण खरीदने का फैसला किया गया है।
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डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि अभी तक एक बैरल की गन थी, जिसमें एक शाट मारने के बाद दुबारा दवा भरने तक में काफी समय लग जाता था, तब तक वन्यजीव के दूसरी तरफ जाने या दवा का असर न होने पर हमला करने का खतरा रहता था।
अब डेनमार्क की बनी विशेष ट्रंकोलाइजर गन को मंगाया गया है, जो डबल बैरल है। इसमें एक साथ दो शॉट चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा कैमरा ट्रैप, दूसरे हथियार और उपकरण मंगाए गए हैं।
इसमें अचूक निशाने के लिए टेलिस्कोप लगा हुआ है। इससे रेस्क्यू आपरेशन चलाने में मदद मिलेगी। जल्द ही वन कर्मियों के लिए इसका प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
- प्रकाश आर्य, एसडीओ
खूबियां
- डबल बैरल गन है
- टेलिस्कोपिक है
- निशाना अचूक
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में मददगार
डीएफओ धकाते कहते हैं कि एक गन की कीमत पांच लाख है। यह गन उत्तराखंड में पहली बार इस्तेमाल की जाएगी। यह सभी प्रभागों में दी जा रही है।