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आपदाः फोल्डिंग पुल दूर करेगा पहाड़ की मुश्किलें

Fri, 18 Jul 2014 04:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Jul 2014 04:27 PM IST
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folding pool for kedarnath disaster

केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनाए फोल्डिंग पुल का लोकार्पण करने देहरादून पहुंचे।

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उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक संगठन और डीआरडीओ मिलकर ग्राम स्तर पर तकनीकी को उद्यमिता से जोड़ें और आम जन को प्रशिक्षण दें, ताकि विकास का क्रम तेजी से बढ़े।

गुरुवार को आर. चिदंबरम दून के हैस्को गांव शुक्लापुर में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनाए मॉडल पुल का लोकार्पण करने पहुंचे थे।

चिदंबरम ने कहा कि डीआरडीओ ने अपनी तकनीकी से ग्रामीणों के लिए कई काम किए हैं।

आपदा में बहे 692 बड़े और 500 छोटे पुल

folding pool for kedarnath disaster

उत्तरकाशी के धारी नौगांव में किसान पहले औने पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर थे, लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ग्रेविटी रोप वे तैयार किया, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें घटी हैं।

अब ग्रामीण उपज ऊपर ही बेच रहे हैं। भाभा अनुसंधान केंद्र के सहयोग से चमोली के गौचर में जल स्रोत बचाए जा रहे हैं।

प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि तीर्थ के आस-पास के लोगों की आर्थिक स्थिति प्रसाद तैयार कर मजबूत की जा सकती है। हैस्को संस्थापक अनिल जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में बीते वर्ष आपदा में 692 बड़े पुल और 500 छोटे पुल बह गए।

राहत कार्य में सबसे बड़ी जरूरत पुलों की है। आपदा आती रही है और आती रहेंगी, जरूरत है कि इसे झेलने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार बने।

देशक डीई पुणे गुरुप्रसाद ने कहा कि यह फोल्डिंग पुल है, जो आसानी से हटाया जा सकता है।

कार्यक्रम में डीजी डीआरडीओ अनिल दत्तर, निदेशक आईआईआरडी डा.केके गुप्ता, वाडिया संस्थान निदेशक प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता, एस चटर्जी, आरसी जोशी, डा. कृष्णमूर्ति, डा. किरन आदि रहीं।

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जानिए मॉडल पुल की खासियत

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- यह अपनी तरह का उत्तराखंड का पहला मॉडल पुल है।
- यह पैदल पुल पूरी तरह स्टील से तैयार किया गया है।
- फोल्डिंग होने के नाते इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है।
- इसी के साथ एक अन्य पुल बनाया गया है, जो तैर सकता है।
- इस पुल पर दोपहिया वाहन भी आसानी से गुजारे जा सकते हैं।
- आपदा आदि में राहत और बचाव कार्य के लिए भी रहेगा कारगर।

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पर्वतीय क्षेत्रों में कारगर है सैन्य फुट ब्रिज तकनीक

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सेना के लिए विकसित माउंटेन फुट ब्रिज तकनीक में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप बदलाव किया गया है।

चंद घंटों में स्थापित होने वाली फुट ब्रिज तकनीक का सिविल वर्जन बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत कार्यों के लिए बेहद कारगर है।

देहरादून में इस तकनीक पर बने ब्रिज को डीआरडीओ प्रमुख डा. अविनाश चंद्र ने सकारात्मक पहल बताया है। उन्होंने कहा कि संस्थान की तकनीक का गैर सैन्य कार्यों में इस्तेमाल करने से आपदा प्रभावित क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

डीआरडीओ के इस फुट ब्रिज के निर्माण में कम लागत आती है। उसे दो से तीन घंटे में स्थापित किया जा सकता है।

सेना के लिए माउंटेन फुट ब्रिज तकनीक

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डीआरडीओ ने सेना के लिए माउंटेन फुट ब्रिज तकनीक विकसित की है, जिसमें 35 मीटर चौड़ी खाई या नदी पर 0.8 मीटर स्पान का ब्रिज बनाया जा सकता है।

डा. चंद्र ने बताया कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्थान पुणे ने 2013 में उत्तराखंड में आई आपदा के बाद माउंटेन फुट ब्रिज को सिविल जरूरतों के अनुरूप बनाने का फैसला किया था।

सिविल के लिए फुट ब्रिज में सामग्री इस्पात रखी गई है, जबकि सैन्य जरूरतों के लिए ठोस सामग्री का इस्तेमाल होता है। उच्च क्षमता वाले एल्यूमीनियम एलॉय से 35 मीटर लंबे सैन्य फुट ब्रिज का वजन 18 किलोग्राम होता है।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-bsbora@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 9675202099 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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