सीएम के ‘विशेषाधिकार’ से हटा वित्त का 'वीटो'
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मुख्यमंत्री के ‘विशेषाधिकार’ पर वित्त विभाग के कुंडली मारकर बैठने की खबर प्रकाशित होते ही बुधवार को संबंधित महकमा हरकत में आ गया। इसके साथ ही वित्त विभाग ने लगभग तीन हफ्ते से लटकी डॉक्टरों की तबादला नीति को मंजूरी देकर उसे प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेज दिया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों के तबादले सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीती 28 अगस्त को चिकित्सकों की तबादला नीति को बिना कैबिनेट में लाए विशेषाधिकार से पास किया था। उन्होंने विशेषाधिकार का इस्तेमाल नीति लाने में देरी के चलते किया था।
नीति लाने में देरी पर सीएम ने स्वास्थ्य मंत्री तक से नाराजगी जताई थी। इसके बाद सीएम के विशेषाधिकार से पास डॉक्टरों की तबादला नीति वित्त की मंजूरी के लिए भेजी गई, लेकिन यहां यह अटक कर रह गई। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने बीती चार सितंबर को 43 चिकित्सकों का तबादला आदेश पुरानी नीति के अनुरूप कर दिया।
इसके बाद से दूसरी तबादला सूची जारी करने के लिए स्वास्थ्य विभाग वित्त के अनुमोदन का इंतजार कर रहा था। अब वित्त से मंजूरी के बाद नीति प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेज दी गई है और स्वास्थ्य विभाग नीति को प्रभावी बनाने की औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गया है। संभावना है कि बुधवार देर शाम तक शासनादेश जारी हो जाएगा। नीति लागू होने से 88 संयुक्त निदेशकों की तबादला सूची भी जारी हो पाएगी।
शिक्षकों की तबादला नीति का ड्राफ्ट जल्द पेश करें
सीएम हरीश रावत ने शिक्षकों की तबादला नीति का ड्राफ्ट भी जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी को दिए हैं। जिसके बाद नीति मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखी जाएगी। सीएम ने शिक्षकों और चिकित्सकों की तबादला नीति पर सख्ती से अमल करने को कहा है।
सीएम ने दोनों महकमों को तबादला नीति बनाने के निर्देश दिए थे। पर्वतीय जनपदों के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने को नई तबादला नीति बनाई जा रही है। अपर मुख्य सचिव एस राजू ने नई तबादला नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसमें तबादलों की समयावधि, एक स्थल पर तैनाती का कार्यकाल, सुगम-दुर्गम और अतिदुर्गम की परिभाषा और दुर्गम में तैनाती के लाभ सहित अनुकंपा के आधार पर रोके जाने वाले तबादलों की स्पष्ट गाइडलाइन है। सुगम से पदोन्नति वाले किसी भी शिक्षक का तबादला सुगम में नहीं हो सकता।
अभी रुका है एक और आदेश
अफसरशाही के जाल में डाक्टरों के तबादलों के आदेश को उलझाने के अलावा शिक्षकों के तबादले और अटैचमेंट रद्द करने के आदेश पर भी आज तक अमल नहीं हुआ है। सीएम हरीश रावत ने खुद इसके आदेश दिए थे।
बता दें कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की अनुमति के बाद शासन ने 159 बेसिक शिक्षकों के तबादले और 60 माध्यमिक शिक्षकों के अटैचमेंट का आदेश किए थे। इससे संबंधित खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री ने तबादले और अटैचमेंट के शासन के आदेश को रद्द करने का ऐलान किया था। लेकिन सीएम के इस आदेश पर आज तक अमल नहीं किया गया है।