हाईप्रोफाइल यौन शोषण मामलों का घिनौना सच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरोप, गिरफ्तारी, ब्लैकमेलिंग और आखिर में आरोप से मुकर जाना। देहरादून के यौन शोषण के आरोपों के कुछ मामले इसके पीछे छिपा घिनौना सच बताते हैं।
चार माह के भीतर यह दूसरा हाईप्रोफाइल मामला है, जिसमें पीड़िता ने खुद आरोपों से इनकार किया है। खास बात यह है कि दोनों ही मामलों में पीड़ित युवतियों पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगे थे। यानी, आरोप कुछ लोगों के लिए सौदेबाजी का जरिया बनते जा रहे हैं।
ऐसे में कानूनी जानकार मानते हैं कि कानून में संशोधन की जरूरत है। वहीं, कुछ मानते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी पीड़िताओं को कदम खींचने पर मजबूर करती है।
पहले लगाए आरोप और फिर मुकर गईं
हरियाणा के पूर्व सांसद के बेटे और सहस्त्रधारा स्थित जॉयलैंड वाटर पार्क के मालिक प्रदीप सांगवान पर एक युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया। उसका कहना था कि आरोपी ने दुराचार के बाद उसकी अश्लील क्लिपिंग भी बनाई।
पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी में खासी मशक्कत करनी पड़ी। दबाव बढ़ा तो प्रदीप ने सरेंडर किया, लेकिन इससे पहले ही युवती 164 (मजिस्ट्रेट के सामने) के बयानों से मुकर गई। आखिर प्रदीप को जमानत मिल गई।
बहुचर्चित जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में भी यही हुआ। 22 नवंबर को पीड़िता युवती ने जेपी जोशी के खिलाफ दिल्ली में जीओ एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद युवती के मजिस्ट्रेट के सामने बयान हुए। लेकिन अब जबकि आरोपी पिछले दस महीने से जेल में है युवती पूर्व में दिए बयानों से मुकर गई है।
पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं?
यौन शोषण प्रकरण की जांच एएसपी ममता बोरा ने की थी। 23 दिसंबर 2013 को ही उन्होंने कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर ली थी। लेकिन शासन ने यह जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है।
12 सितंबर को कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में सीबीसीआईडी के निरीक्षक ईश्वरी दत्त जोशी ने अग्रिम विवेचना के लिए समस्त अभिलेखों की छायाप्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
हालांकि, गुरुवार को इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। कानूनी जानकारों का कहना है कि पुलिस जांच के बाद इस जांच का कोई औचित्य नहीं है।
इनको भी क्लीन चिट का इंतजार
मामले में युवती की गवाही के बाद नीरज चौहान और संजय बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। युवती ने ब्लैकमेलिंग में सिर्फ नीरज और संजय का नाम लिया है।
सूत्रों की मानें तो इसके बाद निलंबित संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया, शाइनी मैक और अनिल गर्ग को भी बाहर निकलने की उम्मीद दिखने लगी है। तीनों को युवती की एक अक्तूबर की गवाही का इंतजार है।
पीड़ित युवतियों को इंसाफ मिल सके इसके लिए गवाही में देरी नहीं होनी चाहिए। उनमें असुरक्षा की भावना बनी रहती है। ऐसे प्रकरणों में तेजी से सुनवाई होनी चाहिए।
- जया ठाकुर, सरकारी वकील