अगर आपने भी किया ऐसा तो फर्जी हो सकता है आपका शस्त्र लाइसेंस, चेक कर लें वरना फिर पछताएंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आपका वर्ष 2009 से 2011 के बीच शस्त्र लाइसेंस बना है तो वह फर्जी भी हो सकता है। समय रहते इसकी जांच करवां ले। ये बात सामने आई है उस कार्यकाल में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से करीब दो सौ शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए गए थे।
फिलहाल डीएम दीपक रावत ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जिले में करीब ग्यारह हजार से अधिक लाइसेंसी असलहा धारक है। देहात क्षेत्र में अधिक असलहा धारक है।
रोजाना असलहा के लिए लाइसेंस बनवाने वाले बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं। डीएम ही लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत है। हाल ही में डीएम दीपक रावत को गोपनीय ढंग से जानकारी मिली कि जिले में कुछ फर्जी लाइसेंसी असलहा धारक भी हैं।
फर्जी हस्ताक्षर कर जारी कर दिए गए
बताया गया कि वर्ष 2009 से 2011 के बीच करीब दो सौ लाइसेंस उस वक्त डीएम रहे अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर जारी कर दिए गए।
ये सब खेल डीएम कार्यालय से ही हुआ है। मामला सामने आने पर डीएम ने इस गोपनीय शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उस दौरान जारी हुए लाइसेंसों को लेकर जांच कमेटी गठित कर दी है।
डीएम ने पुष्टि करते हुए बताया कि यदि लाइसेंस फर्जी पाए जाते हैं तो उन्हें निरस्त किया जाएगा। इसके अलावा उस दौरान तैनात रहे अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।