Exclusive: बारिश और बर्फबारी में भी जगमगाएंगे चीन सीमा के गांव, सेना को भी मिलेगी राहत
- जून से जुम्मा जल विद्युत परियोजना से शुरू हो जाएगा उत्पादन
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बारिश और बर्फबारी में भी उत्तराखंड में चीन सीमा से लगे गांव बिजली से जगमगाते रहेंगे। सेना कैंपों में भी बिजली की दिक्कत नहीं आएगी। उरेडा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण) विभाग की ओर से नीती घाटी के जुम्मा में 1200 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना पूर्ण होने का लक्ष्य आगामी वर्ष के जून माह में रखा गया है।
वर्ष 2009 में उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने जल विद्युत परियोजना जुम्मा का निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन आपदा से परियोजना पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे वर्ष 2013 में इसे उरेडा विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था। विभाग की ओर से चार करोड़ की लागत से परियोजना का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
यदि लक्ष्य के मुताबिक परियोजना का निर्माण होता है, तो नीती घाटी के गांवों में बिजली की समस्या दूर हो जाएगी। जिला प्रधान संघ के महामंत्री पुष्कर सिंह राणा का कहना है कि बारिश और बर्फबारी होने पर ग्रामीणों के साथ ही सेना के जवान लैंप के सहारे रात गुजारते हैं। जुम्मा परियोजना के निर्माण से घाटी में बिजली की समस्या दूर हो जाएगी।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
चीन सीमा क्षेत्र के नीती घाटी में सेना चौकियों के साथ ही ग्राम पंचायत नीती, बांपा, गमशाली, मलारी, महरगांव, द्रोणागिरी, कागा, गरपक, जुम्मा, फरकिया, सुरांईथोटा, जेलम आदि गांवों को इससे लाभ होगा।
ट्रायल से आगे नहीं बढ़ पाई थी करोड़ों की परियोजना
उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने साल 2009 में करोड़ों की लागत से जल विद्युत परियोजना जुम्मा का निर्माण कार्य शुरू किया था। 2013 में परियोजना कार्य पूर्ण हुआ, लेकिन 2013 की आपदा में परियोजना की नहर ट्रायल के समय ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। टरबाइनें मलबे में दब गईं। इसके बाद इस परियोजना को उरेडा विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था।
जल विद्युत परियोजना जुम्मा का निर्माण कार्य लगभग 40 फीसदी हो चुका है। वर्ष 2021 के जून माह तक परियोजना बनकर तैयार हो जाएगी। इससे उत्पादित बिजली ग्रिड पर सप्लाई की जाएगी। परियोजना पर 6-6 सौ किलोवाट की दो टरबाइन कार्य करेंगी।
-विमल किशोर बमराड़ा, गढ़वाल प्रभारी, जल विद्युत परियोजना उरेडा