फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Exclusive: Air travel will now be much safer in North Indian region

एक्सक्लूसिव: उत्तर भारतीय क्षेत्र में अब हवाई यात्रा होगी बहुत अधिक सुरक्षित

Sun, 13 Sep 2020 06:29 PM IST
अलका त्यागी डॉ. गिरीश रंजन तिवारी , अमर उजाला, नैनीताल
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी , अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 13 Sep 2020 06:29 PM IST
सार

  • वायुमंडलीय विक्षोभ निकला पूर्वानुमान से दस गुना अधिक
  • एरीज में लगी एसटी रडार की जानकारियों से विश्लेषण से हुआ संभव
  • एरीज के वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण शोध को विश्व स्तर पर मिली सराहना 

विज्ञापन
Exclusive: Air travel will now be much safer in North Indian region
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

देश के उत्तर भारतीय क्षेत्र में हवाई यात्रा अब बहुत अधिक सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही जलवायु और वायुमंडल में होने वाले परिवर्तनों का सटीक पूर्वानुमान भी लगाया जा सकेगा। यह संभव हुआ है आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण संस्थान  (एरीज) में स्थापित और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित स्ट्रेटोस्फियर ट्रोपोस्फीयर (एसटी) रडार से प्राप्त जानकारियों के विश्लेषण से। एरीज की इस अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि को विश्वस्तरीय सराहना मिली है और इसे अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के जर्नल रेडियो साइंस के ताजा अंक ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है। 

विज्ञापन


उत्तर भारत में वायुमंडलीय विक्षोभ (टर्बुलेंस या हवा में बनने वाला भंवर) का पहली बार आकलन किया गया। इसमें उत्तर भारतीय क्षेत्र में वायुमंडलीय विक्षोभ पूर्वानुमान से दस गुना अधिक मिला। हैदराबाद स्थित आईईसीएल कंपनी ने हाल ही में 15 करोड़ रुपये की लागत से एरीज में एसटी रडार स्थापित किया है, जिसकी मदद से एरीज के वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र के वायुमंडल में होने वाले विक्षोभ का आकलन किया है।
विज्ञापन



इस आकलन से मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी और पूर्वानुमान का भी सटीक आकलन किया जा सकेगा। इस अध्ययन के लिए एरीज के वैज्ञानिकों ने एक गुब्बारा भी छोड़ा जो धरती से 32 किलोमीटर की ऊंचाई तक वायुमंडल के अध्ययन में सक्षम है। इस अध्ययन में पहली बार उत्तर भारत के वायुमंडल में टर्बुलेंस का आकलन किया जा सका। 

विज्ञापन
विज्ञापन

एसटी रडार से संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा

बता दें कि वायुमंडलीय विक्षोभ विमान दुर्घटनाओं और वायुयान की उड़ान में बाधा का एक प्रमुख कारण है। इस शोध में चौंकाने वाला निष्कर्ष मिला कि उत्तर भारत में टर्बुलेंस के विभिन्न मापदंडों एडी डिफ्यूजन और काइनेटिक एनर्जी डीसीपेशन रेट का मान पूर्व अनुमान से दस गुना तक अधिक है।

एरीज के वैज्ञानिक डॉ. मनीष नजा के अनुसार इतने जबरदस्त टर्बुलेंस  का कारण पर्वतीय भूभाग द्वारा वायु में उत्पन्न होने वाली उर्ध्व (वर्टिकल) धाराएं हैं, जो वायुमंडल में बहुत अधिक ऊंचाई तक भंवर उत्पन्न कर सकती हैं। एसटी रडार की इस उपयोगिता का वायुमंडल में प्रबल विक्षोभ वाले संवेदनशील क्षेत्रों का पता लगाया जा सकेगा और उसका पूर्वानुमान भी किया जा सकेगा, जिससे हवाई यात्रा में संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।

दो वर्ष शोध के बाद अध्ययन पूरा किया
एरीज के वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार नजा और उनके शोध छात्र आदित्य जायसवाल ने एरीज के इंजीनियर समरेश भट्टाचार्य और वैज्ञानिक डॉ. डीवी फनीकुमार के सहयोग से दो वर्ष शोध के बाद यह अध्ययन पूरा किया।  एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बताया कि यह रडार डॉप्लर प्रभाव का प्रयोग करके लगभग 20 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति और दिशा की गणना करने में सक्षम है।

इसकी खासियत यह है कि परंपरागत 50 मेगाहर्ट्ज रडार से भिन्न यह सारा रडार सिस्टम एक ही भवन में समाहित है। भवन की छत पर 588 एंटीना लगभग वृत्ताकार आकृति में हैं और उसकी निचली मंजिल पर उतने ही ट्रांसमीटर रिसीवर हैं। इसमें एंटीना को बिना घुमाए मात्र इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल से ही रेडियो बीम को किसी भी दिशा में भेजा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed