पूर्व मंत्री नवप्रभात के इशारों पर जंगल में 'नाचा' कानून
- महाशीर संरक्षण नीति की आड़ में पूर्व वन मंत्री ने खूब की मनमानी
- पूर्व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन चंदोला और पूर्व कार्बेट निदेशक खाती भी कम दोषी नहीं
- पूर्व सीएम बहुगुणा ने त्रिपाठी आयोग को मामले की जांच दी थी
- आयोग की रिपोर्ट आज तक विधानसभा का मुंह नहीं देख पाई
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विस्तार
महाशीर संरक्षण नीति की आड़ में तत्कालीन वन मंत्री नव प्रभात ने कार्बेट नेशनल पार्क में रिजॉर्ट खुलवाया और कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तमाम कायदे-कानून ताक पर रख दिए। तत्कालीन प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. एसके चंदोला और कार्बेट नेशनल पार्क के तत्कालीन निदेशक दिग्विजय सिंह खाती ने अपनी जिम्मेदारी का वहन नहीं किया, वरन मंत्री ने जैसा चाहा वैसा ही वे करते गए।
पुराने लोग बताते हैं कि इस खेल में नवप्रभात ने सीधे अधिकारियों से बात की और प्रमुख सचिव, सचिव और संयुक्त सचिव को दरकिनार कर दिया। उनकी इस कारगुजारी का खुलासा कर कानूनी कार्रवाई करने की बजाए सरकार भी आंखें मूंदे रही। हाल यह है कि त्रिपाठी आयोग ने इस मामले की जांच करके सरकार को रिपोर्ट भी सौंप दी, मगर यह रिपोर्ट आज तक विधानसभा पटल का मुंह नहीं देख सकी।
खबर है कि एंगलिंग प्रोजेक्ट देने के इस पुराने मामले में नियम-कायदों का खुलकर उल्लंघन किया गया। इसमें वन विभाग के अफसरों की भी मिलीभगत रही है। महाशीर संरक्षण नीति और एंगलिंग का यह प्रकरण एनडी तिवारी सरकार के समय का है। इस मामले में आरोप लगे थे कि कार्बेट टाइगर रिजर्व में एक नामचीन होटल को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया।
बिना खुले टेंडर के बांट दिया प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट देने में पारदर्शिता नहीं बरती गई। खुला टेंडर भी नहीं किया गया, जिससे कि अनुभव के आधार पर कंपनियों का चयन किया जा सके। रामनगर क्षेत्र में बेलगाम रिजॉर्ट की बढ़त रोकने, जनहित में सुरक्षा और संरक्षण के मामलों में पूर्व वन मंत्री की तेजी नजर नहीं आई। इस मामले में वर्ष 2004 में बनाई गई महाशीर संरक्षण नीति और तीन पार्टी एमओयू में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है।
इस मामले में यह तथ्य भी सामने आया था कि वन्य जीव आरक्षित क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए खाती ने 13 दिसंबर 2004 को प्रभागीय वनाधिकारी कालागढ़ को पत्र लिखा था, जबकि वन्य जीव क्षेत्र में सड़क नहीं बन सकती।
पत्र में यह भी लिखा गया था कि सड़क न बनने से एंगलिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों में रोष है और वन मंत्री इस संबंध में प्रगति की जानकारी मांग रहे हैं। तत्कालीन कंजर्वेटर इको टूरिज्म राजीव भरतरी पर भी इस मामले में सहभागी होने का आरोप लगा था।
आज तक सदन में नहीं पेश हुई जांच रिपोर्ट
मामला गरमाया तो पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने यह जांच वर्ष 2012 में त्रिपाठी आयोग से कराई थी। यह रिपोर्ट कैबिनेट को दे दी गई है, लेकिन इसे सदन में नहीं रखा गया। इस मामले में तत्कालीन प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. एसके चंदोला से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, मगर संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष जब भी मिलेगा प्रकाशित किया जाएगा।
इनकी सुनिए
अफसरों के आपसी झगड़े ने अच्छी-खासी नीति को खराब कर दिया। इससे प्रदेश का नुकसान हुआ। एंगलिंग करवाने में अनुभव की क्या जरूरत है? लोग होटल खोल रहे थे तो जंगल का संरक्षण होता और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता। नीति बनने के पांच साल बाद टाइगर रिजर्व की घोषणा हुई, तब रिजर्व के नार्म्स ही नहीं थे।
-नव प्रभात, तत्कालीन वन मंत्री
आरोप सरासर गलत हैं। जहां तक सड़क का सवाल है, पुस्ता टूट गया था, उसके निर्माण के लिए कहा था।
-दिग्विजय सिंह खाती, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन (तत्कालीन निदेशक, जिम कार्बेट)