जीत के लिए नेताजी फौजियों को बना रहे हमदम
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उत्तराखंड के चुनाव में तमाम मुद्दों के साथ फौजी फैक्टर भी हावी रहने वाला है। इन दिनों कांग्रेस और भाजपा में अपनी-अपनी बटालियन में पूर्व फौजियों को शामिल करने की होड़ है।
कांग्रेस हाल ही ले. जनरल टीपीएस रावत को अपने साथ ले आई तो भाजपा ने बुधवार को दर्जनों पूर्व सैनिकों- अफसरों को अपने पाले में किया।
कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले वन रैंक वन पेंशन का तोहफा तो दिया लेकिन उसे अभी लागू न करने पर घिरती नजर आ रही है।
आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले जिस उत्तराखंड रक्षा मोर्चा को अपनाया था, उसके सभी नेता सामने वाली सेना के साथ खड़े हो गए हैं।
भाजपा : पूर्व सैनिकों को अपनी ओर खींचने की कवायद
भाजपा ने भी पूर्व सैनिकों को अपनी ओर खींचने की कवायद शुरू की है। राज्य के करीब पौने दो लाख पूर्व सैनिकों पर भाजपा की निगाह लगी है।
पौड़ी संसदीय क्षेत्र में पूर्व सैनिकों की संख्या सर्वाधिक है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री सेवानिवृत्त मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी मोर्चा संभाले हैं। पार्टी इसी फैक्टर केचलते यहां से खंडूड़ी को मैदान में आगे करती है।
सैनिकों के बीच भाजपा पूर्व मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी को आगे करती रही है। कांग्रेस ने पौड़ी से सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत को उतारा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत की मौजूदगी में बुधवार को दर्जनों पूर्व फौजी अफसरों व सैनिकों ने पार्टी की सदस्यता ली। रावत ने पूर्व फौजी अफसरों व सैनिकों का गर्मजोशी के साथ स्वागत कर पार्टी की सदस्यता दिलाई।
इस मौके पर पौड़ी सांसद सतपाल महाराज, मसूरी विधायक गणेश जोशी ने भी पार्टी में आए पूर्व सैनिकों का माला पहनाकर स्वागत किया। महाराज ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन भाजपा की ही देन है।
ये पूर्व फौजी हुए भाजपा में शामिल
भाजपा में शामिल होने वालों पूर्व फौजियों में कर्नल बीएस. खत्री, कर्नल अरुण कुमार सिन्हा, ले.कर्नल जीवन सिंह बसेरा, मेजर वाईपी थापा, कैप्टन मनोला, श्याम सिंह गुरुंग, कैप्टन खेम बहादुर थापा, दरबान सिंह बिष्ट, सीवी थापा, नरेंद्र सिंह कार्की, अमर सिंह गुसांई, नायक सूबेदार सहदेव भंडारी, किशन सिंह थापा, हरीचंद्र गुरुंग, वीरसिंह बहादुर थापा, मेक बहादुर थापा, बिशन सिंह गुरुंग, नेतासिंह प्रधान, बलवीर सिंह गुरुंग, कृष्ण कुमार, सुरेश प्रधान, सूबेदार प्रेमसिंह आले, हेमराज क्षेत्री, हवलदार लाल बहादुर क्षेत्री, नायक श्याम सिंह गुरुंग, भूपेंद्र सिंह खत्री, जीपी. नैनवाल, चंदन सिंह क्षेत्री, वीएस. नेगी, दाताराम. जोशी, तुलाराम थपलियाल, विक्रम सिंह आदि हैं।
वीके सिंह को उतारेगी मैदान में
फौजी वोटों को लेकर छिड़ी जंग में भाजपा जल्द ही जनरल वीके.सिंह को भी उतारने जा रही है।
गाजियाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के बाद भाजपा वीके सिंह को उन सीटों पर भेज रही है जहां फौज से जुड़े लोगों की संख्या अधिक है।
पार्टी उत्तराखंड के लिए विशेष तौर पर उनके कार्यक्रम तय कर रही है। जनरल वीके.सिंह का मुकाबला उत्तराखंड में कांग्रेस की ओर से ले. जनरल टीपीएस रावत और ले. जनरल गंभीर सिंह नेगी से होगा।
कांग्रेस: वन रैंक वन पेंशन, दे सकती है टेंशन
यूपीए सरकार का पूर्व सैनिक मतों के लिए खेला वन रैंक वन पेंशन का चुनावी कार्ड उत्तराखंड की चुनावी जंग में अहम हो गया है।
चुनाव से ठीक पहले अंतरिम बजट में वन रैंक वन पेंशन की घोषणा पहली अप्रैल 2014 से प्रभावी हो चुकी है, जिसके मुताबिक बैंक खातों में 30 अप्रैल को बढ़ी हुई पेंशन पहुंचेगी।
सूत्रों की माने तो अभी रक्षा मंत्रालय ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने से बनने वाला नया पेंशन ढांचा भुगतान संस्थानों तक नहीं पहुंचाया है।
अगर पूर्व सैनिकों को पेंशन वृद्धि नहीं मिली तो सात मई को राज्य में होने वाले मतदान में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती है। वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय ने फरवरी में पांच सौ करोड़ का प्रावधान कर लागू कर दिया है।
पेंशन वृद्धि करना बड़ी चुनौती
वन रैंक वन पेंशन के तहत वर्ष 2006 से पूर्व रिटायर सैनिकों को अब रिटायर होने वाले सैनिकों के समान पेंशन मिलेगी। इसे प्रभावी बनाने के लिए लगभग 2400 करोड़ की जरूरत है।
ऐसे में यूपीए सरकार के लिए निर्धारित बजट प्रावधान में पेंशन वृद्धि करना बड़ी चुनौती बन गया है। सेंट्रल डिफेंस अकाउंट्स से पेंशन वृद्धि के नए प्रारूप का भुगतान करने वाले बैंक या अन्य संस्थानों के पास अभी तक नहीं पहुंचा है।
अमूमन प्रत्येक माह की 28 तारीख तक पूर्व सैनिकों के खातों में पेंशन पहुंच जाती है, जिसमें दो सप्ताह से कम का समय शेष है।
इस बीच अगर पेंशन की नई व्यवस्था लागू नहीं हुई तो एक मई के बाद जिन राज्यों में लोकसभा चुनाव का मतदान शेष है वहां पासा कांग्रेस के लिए उलटा पड़ जाएगा।
दस फीसदी वोटों का है मामला
उत्तराखंड में 10 फीसदी आबादी सीधे तौर पर पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों की है।
तीन पर्वतीय सीटों पौड़ी, अल्मोड़ा और टिहरी का गणित तो पूर्व सैनिकों के वोट बैंक पर टिका है। यहां वन रैंक वन पेंशन लागू करने का कांग्रेस सर्वाधिक प्रचार भी कर रही है।