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इस खतरे से गंगा को कैसे बचा पाएंगे मोदी?

Fri, 13 Jun 2014 01:14 AM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 13 Jun 2014 01:14 AM IST
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Encroachment on ganga by priest
केंद्र की मोदी सरकार की गंगा को लेकर संवेदनशीलता का धर्मनगरी में स्वागत किया गया है। लेकिन यह सवाल भी पूछा जा रहा है, गंगा के तटों से धार्मिक अतिक्रमण कौन सा कानून समाप्त करेगा।
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पंडों ने हर घाट को अस्थि प्रवाह घाट बनाकर जो धार्मिक अतिक्रमण किया है, उससे निपटने का कानून भी बनना चाहिए।

गंगा में अस्थि प्रवाह के लिए केवल हरकी पैड़ी और कनखल के सती घाट को निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद अनेक पंडे अवैध रूप से दर्जनों घाटों पर अस्थि प्रवाह कराकर गंगा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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तीर्थ पुरोहितों की संस्थाओं ने ऐसे पंडों को कई बार खदेड़ा भी, किंतु यह कार्य आज तक जारी है। हालात यहां तक खराब हुए हैं कि कुशाघाट पर भी अस्थि प्रवाह कराने से गंगा की पंचस्नानी का एक स्नान समाप्त हो गया है।
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धर्म जगत के लिए कानून बने तो स्वागत

Encroachment on ganga by priest

गंगा के घाटों पर जितने अतिक्रमण हैं, उसका 75 प्रतिशत धार्मिक अतिक्रमण है। गंगा तटों से जितनी गंदगी गंगा में फेंकी जा रही है, उसके लिए तीन चौथाई जिम्मेदार आध्यात्मिक जगत है।

दुर्भाग्य से गंगा के लिए बनाए जा रहे कानूनों में धार्मिक अतिक्रमण पर दंड की चर्चा नहीं है। जब तक गंगा को मैली करने वाले तथाकथित धर्म जगत को भी दंडित नहीं किया जाता, तब तक लाख कोशिश करें, गंगा प्रदूषण मुक्त नहीं हो पाएंगी।

धर्म जगत का दायित्व है कि वह गंगा को प्रदूषित करने वाले तत्वों के खिलाफ खड़ा हो। दुर्भाग्य का विषय है कि हरिद्वार में कई पुरोहित अवैध रूप से अवैध घाटों पर धार्मिक कर्म-कांड कराकर उन तीर्थ यात्रियों को धोखा दे रहे हैं, जो पंडों के भरोसे हरिद्वार आते हैं।

गंगा सभा ने कई बार ऐसे पुरोहितों तटों से खदेड़ा है। धार्मिक जगत के लिए बनने वाले सख्त कानून का स्वागत किया जाएगा।
-वीरेंद्र श्रीकुंज, महामंत्री गंगा सभा

धर्म से जुड़े लोगों के ल‌िए हो सख्त कानून

Encroachment on ganga by priest

प्रदूषण के लिए यदि धार्मिक जगत जिम्मेदार है तो धर्मज्ञों के लिए सख्त कानून बनना चाहिए। गंगा सबकी मां है, धर्म से जुड़े लोगों का दायित्व अन्य सभी से अधिक है।

गंगा के तटों को अनेक फक्कड़ साधु लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। कई पंडे किसी भी घाट पर अस्थि प्रवाह और कर्मकांड कराकर धार्मिक आस्थाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। मोदी सरकार को धर्म से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ भी कानून बनाकर सजा का प्रावधान करना चाहिए।
-श्रीमहंत हरि गिरी, महामंत्री अखाड़ा परिषद।

गंगा को मैला करने में मठ-आश्रम आगे

Encroachment on ganga by priest

गंगा को प्रदूषण मुक्त करना है तो तो इसके उद्गम स्थल से ही सख्ती बरतनी होगी। अगर ऐसा हुआ तो उत्तरकाशी जनपद में कई बड़े मठ एवं आश्रम भी इसकी चपेट में आने से नहीं बच पाएंगे।

जिले की सीमा में चिन्यालीसौड़ से लेकर भोजवासा तक गंगा भागीरथी के तट कब्जा कर दर्जनों आलीशान आश्रम बने हैं।

स्थानीय लोगों ने यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए होटल आदि खोले तो कई धर्माचार्यों ने भी साधना और आस्था के नाम पर गंगा तट कब्जा कर बहुमंजिला होटल नुमा आश्रम खड़े करने से परहेज नहीं किया।

लोगों को धर्म एवं गंगा के प्रति आस्था का पाठ पढ़ाने वाले अधिकांश आश्रमों की गंदगी भी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से गंगा में ही जा रही है।

आश्रमों में कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं

Encroachment on ganga by priest

जब जिले में सरकारी निकाय एवं विभागों के पास ही सीवर एवं कचरा निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं है तो फिर गंगा तट पर बने इन आश्रमों की क्या कहें।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि लोगों को गंगा की आस्था का पाठ पढ़ाने वाले आश्रम ही जब गंगा को मैला करेंगे तो औरों से क्या उम्मीद की जा सकती है?

इनका है कहना
उत्तरकाशी नगर में गंगा तट पर बने आश्रम आदि भवन सीवर लाइन से जुड़े थे। यह सीवर ट्रीटमेंट योजना बाढ़ में क्षतिग्रस्त पड़ी है। नगर के अलावा और कहीं सीवर आदि गंदगी को गंगा में जाने से रोकने की व्यवस्था नहीं है।
-सुरेश पाल, परियोजना प्रबंधक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई।

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