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एक सप्ताह और रहेगा खटीमा में अंधेरा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 01 Sep 2014 08:21 PM IST
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बाढ़ से प्रभावित उत्तराखंड के खटीमा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह बहाल करने में एक हफ्ते से अधिक का समय लग जाएगा। ऊर्जा निगम ने क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक करने का काम सोमवार सुबह से शुरू कर दिया।
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पावर हाउस की सुरक्षा दीवार टूटने से ऊर्जा निगम और पिटकुल की विद्युत लाइन भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। ऊर्जा निगम और पिटकुल के अधिकारी सोमवार सुबह खटीमा पहुंचे।
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ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएस यादव, निदेशक (परियोजना) जीके शर्मा, मुख्य अभियंता उधमसिंहनगर जेएमएस रौथाण व एनसी तिवारी, पिटकुल के निदेशक (परिचालन) एसके शर्मा खटीमा में कैंप कर रहे हैं।
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वैकल्पिक व्यवस्था के लिए नानकमत्ता सब स्टेशन के फीडरों से खटीमा में सोमवार चार से छह घंटे बिजली आपूर्ति की गई। ऊर्जा निगम के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम के 40 एमवीए के ट्रांसफार्मर को शुरू करने की कोशिश जारी है। इस ट्रांसफार्मर के शुरू होते ही खटीमा में 12 घंटे की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी।
नदियों में सिल्ट से परेशानी
42 मेगावाट क्षमता के खटीमा जल विद्युत गृह से अगले कुछ दिन तक उत्पादन नहीं मिल पाएगा। नदियों में सिल्ट आने की वजह से मनेरी भाली-प्रथम से 60 मेगावाट, मनेरी भाली-द्वितीय से 270 मेगावाट, छिबरो से 150 मेगावाट ही बिजली मिल पाई। कालागढ़ जल विद्युत गृह से करीब तीन हफ्ते बाद भी उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है।
हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर में घोषित कटौती
सोमवार को हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े तीन घंटे और ऊधमसिंह नगर के छोटे शहरों में डेढ़ घंटे की घोषित बिजली कटौती हुई। इसके अलावा काशीपुर-मुरादाबाद लाइन सुबह नौ बजे से साढ़े नौ बजे तक मुरादाबाद की तरफ से ट्रिपिंग के कारण बंद रही। सोमवार को राज्य में बिजली की मांग तीन करोड़ 36 लाख 50 हजार यूनिट रही। जबकि, उपलब्धता तीन करोड़ 27 लाख 80 हजार यूनिट रही। मंगलवार के लिए हिमाचल से 25 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई है।