Uttarakhand: नियामक आयोग के लिए महंगी बिजली पर लगाम लगाने की चुनौती, एक अप्रैल से लागू होनी हैं नई दरें
पुराना रिकॉर्ड देखें तो नियामक आयोग ने वर्ष 2009 में सर्वाधिक 17 प्रतिशत बढ़ोतरी की थी। पिछले 10 साल की बात करें तो 9.64 प्रतिशत से ऊपर बढ़ोतरी नहीं हुई है। अगले साल लोकसभा चुनाव व राज्य के निकाय चुनाव भी होने हैं। ऐसे में नियामक आयोग के लिए निर्णय लेना टेढ़ा काम होगा।
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यूपीसीएल की ओर से बिजली दरों में बढ़ोतरी का जो प्रस्ताव दिया गया है, उस पर निर्णय लेना नियामक आयोग के लिए चुनौती है। एक ओर यूपीसीएल ने अपने दावे में तमाम मजबूत आधार दिए हैं तो दूसरी ओर अगले साल के आम चुनाव, निकाय चुनाव के बीच नियामक आयोग को निर्णय लेना है।
पुराना रिकॉर्ड देखें तो वर्ष 2009 में आयोग ने सर्वाधिक 17 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद से औसत बढ़ोतरी दो से पांच प्रतिशत ही रही है। यूपीसीएल की याचिका आने के बाद नियामक आयोग इसकी समीक्षा करेगा। इसमें अगर कुछ कमियां हुईं तो उनमें सुधार के लिए यूपीसीएल को भेजा जाएगा। इसके बाद इस याचिका को सार्वजनिक करते हुए नियामक आयोग जनसुनवाई करेगा और सुझाव मांगेगा। यूपीसीएल समेत सभी हितधारकों से भी बातचीत की जाएगी। फिर आयोग निर्णय लेगा, जो एक अप्रैल 2024 से लागू हो जाएगा। लेकिन इस बार चुनौती जरा कठिन लग रही है।
यूपीसीएल ने देनदारी के साथ ही अपने 23 से 27 प्रतिशत के दावे में जो आधार दिए हैं, वह काफी मजबूत हैं। वहीं अगले साल लोकसभा चुनाव व राज्य के निकाय चुनाव भी होने हैं। ऐसे में नियामक आयोग के लिए निर्णय लेना जरा टेढ़ा काम होगा। पुराना रिकॉर्ड देखें तो नियामक आयोग ने वर्ष 2009 में सर्वाधिक 17 प्रतिशत बढ़ोतरी की थी। पिछले 10 साल की बात करें तो 9.64 प्रतिशत से ऊपर बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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नियामक आयोग ने दस साल में कितने प्रतिशत बढ़ाए दाम
वर्ष - प्रतिशत बढ़ोतरी
2013 - 5.00
2014 - 00
2015 - 7.30
2016 - 5.10
2017 - 5.80
2018 - 2.60
2019 - 3.50
2020 - 4.50
2021 - 3.54
2022 - 2.68
2023 - 9.64