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उत्तराखंडः बिजली महंगी होगी, पर मिलेगी 24 घंटे

Tue, 10 Mar 2015 04:57 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 10 Mar 2015 04:57 PM IST
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electricity cost increases in uttarakhand.

बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही सरकार अब उद्योगों को थोड़ी महंगी पर 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की कोशिश में है।

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इसके लिए गैस आधारित बिजली पर दाव खेला जा रहा है। ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार का कहना है कि यह बिजली थोड़ी महंगी जरूर होगी पर इसकेबावजूद यह अन्य राज्यों की तुलना में ससती होगी।
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सीआईआई के सोमवार को हुए सम्मेलन में बिजली की उलब्धता एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी। टाटा मोटर्स पंतनगर के प्लांट हैड आलोक सिंह ने सिडकुल हरिद्वार और रुद्रपुर का उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि बिजली की दरों में पिछले दस साल में खासा इजाफा हुआ है पर आपूर्ति में कमी आई है।
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मांग पूरी न होने का असर उत्पादन पर पड़ रहा है। जल विद्युत ऊर्जा और सौर ऊर्जा के लिए सरकार को रोडमैप सामने रखना चाहिए। नार्वे जैसा देश भी है जो तेल और गैस का निर्यातक है पर अपनी 90 प्रतिशत ऊर्जा पूर्ति जल विद्युत ऊर्जा से पूरी करता है। लाइन के साथ ही अन्य तरह की ऊर्जा हानि कम करनी होगी।

ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार ने उद्योगों की इस समस्या का समाधान सामने रखा। ऊर्जा सचिव ने कहा कि गैस आधारित ऊर्जा के उपयोग पर उद्योग राजी हो जाएं तो सरकार 24 घंटे बिजली उद्योगों को उपलब्ध कराएगी। उत्तराखंड इस समय 4.59 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से उद्योगों को बिजली दे रही है।

गैस आधारित बिजली ज्यादा से ज्यादा एक रुपये और महंगी हो सकती है। उत्तर प्रदेश में बिजली 6.80 रुपये प्रति यूनिट और हिमाचल में 5.51 रुपये प्रति यूनिट है। साफ है कि गैस आधारित बिजली भी अन्य राज्यों की तुलना में सस्ती होगी।


उमाकांत पंवार ने यह भी स्वीकार किया कि प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाएं पर्यावरण के कानूनी पचड़े में फंस कर रह जा रही है। ऐसे में आगे आने वाले तीन साल में 500 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन की संभावना है।

तो फार्मा पलायन कर जाएगी राज्य से

विशेष औद्योगिक पैकेज के समाप्त होने का सबसे ज्यादा असर 800 करोड़ रुपये से अधिक की फार्मा पर है। फार्मा एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद कालानी के मुताबिक पिछले पांच साल की कोशिश के बाद भी फार्मा को स्टेट टेस्टिंग सेंटर के लिए प्रदेश में जमीन नहीं मिल पा रही है।

ऐसे में अन्य राज्यों के निवेशक प्रदेश से पलायन करने का मन बना रहे हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फार्मा की समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।

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