...तो गुल हो जाएगी दून अस्पताल की बिजली
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बजट की कमी झेल रहे दून अस्पताल पर जहां बिजली कनेक्शन कटने का संकट गहराया है, वहीं भर्ती मरीजों को मुफ्त दवा और भोजन के भी लाले पड़ सकते हैं।
लाखों के बिजली बिल के अलावा निशुल्क भोजन, दवा, लोकल पर्चेज, सर्जिकल उपकरण मिलाकर पांच करोड़ की देनदारी बन गई है। अकेले बिजली बिल का बकाया 15 लाख रुपये है। फर्में बकाया नहीं मिलने से सप्लाई रोकने की चेतावनी दे चुकी हैं तो ऊर्जा निगम ने बिजली कनेक्शन काटने का नोटिस थमा दिया है।
अस्पताल को प्रत्येक तीन महीने में बजट दिया जाता है। इस बार अब तक महज 2.50 करोड़ रुपये का बजट ही अस्पताल को मिल पाया है। इस वजह से अस्पताल पर दवा, भोजन, सर्जिकल उपकरण, लोकल पर्चेज की दवा आदि की आपूर्ति करने वाली फर्मों का लाखों रुपये का बकाया हो गया है।
बकाये का भुगतान न होने के कारण इन फर्मों ने आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी है। ऐसे में अस्पताल में दवा, भोजन और सर्जिकल उपकरणों का संकट हो सकता है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों के वेतन का भी 50 लाख रुपये से अधिक का बकाया अस्पताल पर है। दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि बजट न मिलने के कारण अस्पताल पर बकाया बढ़ रहा है। महानिदेशालय से बजट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
प्रबंधन समितियां नहीं कर पाई उद्देश्य पूरा
अस्पतालों में बिजली, पानी, भोजन, दवा आदि के लिए अलग अलग मदों में दी जाने वाली व्यवस्था में बदलाव से यह स्थिति पैदा हुई। सरकार ने अस्पतालों के बेहतर प्रबंधन के लिए सभी बड़े अस्पतालों में चिकित्सा प्रबंधन समितियों का गठन तो किया लेकिन वह प्रभावी साबित नहीं हो रही है।
सात वर्ष पहले विभिन्न मदों में मिलने वाले बजट की व्यवस्था को समाप्त कर समितियों के माध्यम से एक साथ बजट दिया जाने लगा। वार्षिक बजट का प्रस्ताव इन्हीं जिलों के डीएम की अध्यक्षता वाली समितियों को देना होता है। इसके लिए चिकित्सा अधीक्षक को प्रस्तावित खर्चों का प्रारूप तैयार करना होता है, जिसके सापेक्ष महानिदेशालय फंड जारी करता है।
यह व्यवस्था समय के साथ लचर हो गई और अस्पताल बीते वर्ष से 10-15 प्रतिशत बजट बढ़ाकर अस्पतालों को मिलने लगा। जबकि अस्पतालों की प्रबंधन समितियों को हर मद में कितना खर्चा बढ़ा है, इसका आकलन कर प्रस्ताव भेजना होता है। इसी के चलते बजट की व्यवस्था बिगड़ गई।
पालिसी में बदलाव की तैयारी में विभाग
दून के अलावा अन्य अस्पतालों से भी बजट खर्च को लेकर समस्याएं आ रहीं है, जिसके चलते मौजूदा प्रबंधन समितियों की व्यवस्था में नीतिगत बदलाव की तैयारी हो रही है।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी भट्ट ने बताया कि समितियों को सशक्त बनाने के लिए उनमें अकाउंट्स और फाइनेंस के लोग शामिल किए जाएंगे जो बजट को तैयार कर सकें। इतना ही नहीं अस्पतालों में चिकित्सा अधीक्षक उन्हीं को बनाया जाएगा जो प्रबंधन में प्रशिक्षित होंगे। इसके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम की व्यवस्था भी रहेगी।
इनका है कहना
दून अस्पताल में बजट की कमी को तुरंत दूर किया जाएगा। बजट के अभाव में कोई भी सेवा प्रभावित नहीं होगी। हम इसका आकलन भी कर रहे हैं कि बकाया बढ़ने के कारण अस्पताल प्रबंधन की प्रशासनिक खामियां तो नहीं है।
-डॉ. आरपी भट्ट डीजी हेल्थ