उत्तराखंड: मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद पर आयोग ने लगाई रोक, जरूरतमंदों की बढ़ेगी परेशानी
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नगर निकाय चुनाव के लिए लागू आचार संहिता के चलते मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से जरूरतमंदों को फिलहाल मदद नहीं मिल पाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में सरकार को अनुमति नहीं दी है। हालांकि उन आपदा प्रभावितों या गंभीर रोगियों को जरूर मदद मिलेगी, जिनके मामले पूर्व में स्वीकृत हैं। ऐसे सभी मामलों में राज्य सरकार आर्थिक मदद दे सकेगी।
सरकार की ओर से निर्वाचन आयोग से मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश मांगे गए थे। सरकार ने कहा था कि राज्य के जरूरतमंद लोगों की मदद का यह एक बहुत महत्वपूर्ण जरिया है।
गंभीर बीमारियों से लेकर अन्य दिक्कतों में फंसे लोग प्रार्थना पत्र देते हैं और उनकी यथोचित मदद की जाती है। सरकार ने आयोग से पूछा था कि चुनाव आचार संहिता के लागू रहते हुए बहुत जरूरी मामलों में लोगों को मदद दी जा सकती है या नहीं। इस पर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है।
सीएम के शुभकामना कार्ड खास लोगों को ही
शासन के सूत्रों के अनुसार आयोग ने कहा है कि आचार संहिता लागू होने की स्थिति में किसी भी नए प्रकरण में मदद नहीं दी जा सकती। ऐसा किया जाना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। वहीं, आयोग ने पूर्व में स्वीकृत आपदा प्रभावितों और गंभीर मरीजों के मामलों में रोक नहीं लगाई।
सीएम की ओर से दीपावली की शुभकामनाओं से संबंधित कार्ड इस बार चुनिंदा लोगों तक ही पहुंच पाएंगे। चुनाव आचार संहिता का असर सीएम के शुभकामना कार्ड पर भी पड़ा है। राज्य निर्वाचन आयोग से सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस संबंध में अनुमति मांगी थी।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सीएम के शुभकामना कार्ड राज्यपाल, मंत्रियों, विधायकों, आयोगों के अध्यक्षों, आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों को ही दिए जा सकेंगे। आयोग के आदेश के बाद साफ है कि सामान्य वोटरों तक इस बार सीएम के शुभकामना कार्ड नहीं पहुंचेंगे।