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...तो उत्तराखंड को तबाह कर सकता था भूकंप

प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 03 Apr 2015 12:52 PM IST
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earthquake dangerous for uttarakhand.

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शुक्र है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार को आए भूकंप का केंद्र शहर से दूर था। अगर भूकंप संरचना का असर सतह तक पहुंचता तो यह कहर बरपा सकता था।
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रिक्टर पैमाने पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आपदा की दृष्टि से संवेदनशील चमोली जनपद में एक बार फिर तबाही ला सकता था।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ भूकंप वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार के अनुसार जमीन के भीतर इतनी स्ट्रेन एनर्जी है, जो कभी भी कहर बरपा सकती है।


यह बड़े भूकंप के रूप में ही बाहर निकलती है। हिमालय के अन्य क्षेत्रों की तरह गढ़वाल-कुमाऊं के क्षेत्र में भी यह ऊर्जा एकत्र हो रही है। प्रतिष्ठित जर्नल जियोलाजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया में प्रकाशित हो ‘इवैल्यूएशन एंड इंप्लिकेशंस आफ सीस्मिक इवेंट्स इन गढ़वाल-कुमाऊं रीजन आफ हिमालया’ नाम के पेपर में इस ऊर्जा के बाबत चिंता जाहिर की गई है।

छोटे-मोटे भूकंप इस क्षेत्र में आते ही रहते हैं। बृहस्पतिवार को आए भूकंप की लहरें अगर जमीन के भीतर ही न रहतीं तो विस्फोटक हो सकती थीं।

5.5 से अधिक तीव्रता वाले 21 भूकंप
बीती सदी में रिक्टर पैमाने पर 5.5 से अधिक की तीव्रता वाले कुल 21 भूकंप रिकार्ड किए गए हैं। वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान की ओर से जमीनी हलचल पर नजर रखने के लिए उत्तराखंड में सात, हिमाचल में दो और उत्तर प्रदेश के एक ब्राड बैंड स्टेशन स्थापित किया गया है।
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