Dehradun: लाखों के लालच में कर दिया दोस्त का कत्ल, मिले सिर्फ 5700 रुपये, नदी में फेंकना चाहता था लाश
एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए पत्रकारों को बताया कि गत 29 दिसंबर को संजय कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने दुर्गंध आने पर पुलिस को सूचना दी थी।
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मोहिनी रोड इलाके में हुई अशरफ की हत्या के आरोपी उसके दोस्त सुहैल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हत्यारोपी को उम्मीद थी कि अशरफ ने कमरे और ऑफिस में चिटफंड के लाखों रुपये छुपाए हैं। इन्हीं रुपयों के लालच में उसने अशरफ के सिर पर सिलिंडर मारकर मौत के घाट उतार दिया। हालांकि, कमरे की तलाशी ली तो केवल 5700 रुपये ही बिस्तर के नीचे से मिले।
एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने शनिवार को इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए पत्रकारों को बताया कि गत 29 दिसंबर को संजय कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने दुर्गंध आने पर पुलिस को सूचना दी थी। जिस मकान से दुर्गंध आ रही थी, उसमें जाकर देखा तो वहां बोरे में छुपाई गई एक सड़ी गली लाश मिली। इसकी पहचान अशरफ निवासी जाफ्तागंज नजीबाबाद के रूप में हुई। शुरुआती जांच में पता चला कि अशरफ गुलिस्ता म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड नाम से एक चिटफंड कंपनी चलाता था।
उसके साथ सुहैल उर्फ सलमान भी काम करता था। सुहैल इस मकान में किराये पर अशरफ के साथ ही रहता था। उनका कमरा 22 दिसंबर से बंद था और सुहैल का कहीं पता नहीं चल रहा था। पुलिस को पता चला कि इनके साथ पटेलनगर क्षेत्र में रहने वाली एक युवती भी काम करती थी। इस युवती के माध्यम से सुहैल का फोन नंबर मिला। इसकी जांच करते हुए ही पुलिस सुहैल के पीछे नजीबाबाद तक जा पहुंची। पुलिस टीम ने शुक्रवार रात को सुहैल को गिरफ्तार कर लिया। सुहैल ने पूछताछ में सारी बात उगल दी।
अशरफ नहीं दे रहा था पैसों का हिसाब
सुहैल ने पुलिस को बताया कि अशरफ नजीबाबाद में इसी तरह की कंपनी चलाता था। उसे वहां नुकसान हुआ तो वह देहरादून चला आया। अशरफ ने भगत सिंह कॉलोनी में एक ऑफिस किराये पर लिया। उसके साथ सुहैल भी काम करने के लिए आ गया। शुरुआत में सुहैल को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने की बात हुई। करीब 200 लोगों के खाते इस कंपनी में खोल दिए गए लेकिन अशरफ, सुहैल को पैसों का हिसाब नहीं बता रहा था। इस पर दोनों के बीच झगड़ा होने लगा। एक माह केवल पांच हजार रुपये सुहैल को दिए गए।
सुहैल ने 21 की रात में ही कर दी थी हत्या
सुहैल, अशरफ से और पैसे लेना चाहता था लेकिन अशरफ ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। 21 दिसंबर को सुहैल कमरे पर गया तो देखा कि अशरफ वहीं मौजूद था। दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो अशरफ ने सुहैल को बाहर निकाल दिया। सुहैल को ठंड लगी तो उसने फिर उसे अंदर बुला लिया। रात को ही पैसों के लालच में उसने हत्या की योजना बनाई। अशरफ रात को सो गया। इस पर सुहैल ने वहां से छोटा गैस सिलिंडर उठाया और उसके सिर पर मार दिया। इससे अशरफ की मौत हो गई।
नदी में फेंकना चाहता था लाश को, नहीं उठा पाया बोरा
हत्या के बाद सुहैल ने नायलॉन की रस्सी से अशरफ के पैर बांध दिए और शव को रजाई में लपेटकर बोरे में बंद कर दिया। वह इस शव को सामने नदी में फेंकना चाहता था लेकिन भारी होने के कारण वह बोरे को नहीं उठा पाया। वह रात में ही कमरा बंद कर चला गया। अगले दिन 22 दिसंबर को वह भगत सिंह कॉलोनी स्थित ऑफिस में गया। वहां का ताला तोड़कर ऑफिस की तलाशी ली लेकिन वहां से भी कुछ नहीं मिला। इसके बाद वह फिर कमरे पर आया और ताला लगाकर बिजनौर चला गया।