देवभूमि की व्यथा कथा: नशे की लत ने करियर किया चौपट, आजीवन अपंग भी बनाया
- रुद्रप्रयाग में शराब के ठेकों की संख्या हुई दोगुनी, कारोबार पहुंचा 48 करोड़ तक
- अवैध शराब भी पहुंच रही दूरस्थ गांवों में, स्मैक और अन्य नशा भी तेजी से पसार रहा पैर
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‘दारू बिना यख मुक्ति नीं, बिना दारू की कोई जुगती नीं, ई देवभूमि मां दारू की गंगा बगती जाणी, रुकदी नीं ... उत्तराखंड के ’ लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी का यह गीत आज पहाड़ में शराब के बढ़ते प्रचलन की हकीकत को बयां कर रहा है।
शराब के खिलाफ महिलाओं के लगातार आंदोलित होने के बावजूद शराब पर अंकुश नहीं लग सका है। बीते वर्ष ऊखीमठ, चोपता, खांकरा में शराब के ठेकों का विरोध हुआ तो सरकार द्वारा यह ठेके दूसरे स्थानों में शिफ्ट कर दिए गए।
ऊखीमठ की दुकान गौरीकुंड हाईवे पर काकड़ागाड़ में, चोपता की दुकान सतेराखाल और खांकरा की दुकान को बदरीनाथ हाईवे पर सिरोहबगड़ के सामने शिफ्ट कर दिया गया। पांच वर्षों में जिले में शराब के ठेकों की संख्या चार से बढ़कर नौ तक पहुंच गई है और शराब का सालाना कारोबार 45 से 48 करोड़ रुपये तक हो गया है।
वैध शराब के साथ ही अवैध शराब का धंधा भी खूब फल फूल रहा है। बच्छणस्यूं से मोहनखाल, चंद्रनगर से लेकर रानीगढ़, तल्लानागपुर और केदारघाटी तक के इलाकों में धड़ल्ले से अवैध शराब की सप्लाई हो रही है।
इन्होंने खुद को किया बर्बाद
जनपद निवासी एक युवक दो वर्ष पूर्व नई दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ रहता था। पढ़ाई के दौरान वह, स्मैक, कोकीन और अन्य नशीली दवाओं की गिरफ्त में आ गया। वह सॉफ्ट ड्रिंक्स में नशा मिलाकर उसे इंजेक्शन में लेने लगा। परिजनों ने उसे डॉक्टरों को दिखाने के साथ उसकी काउंसिलिंग भी कराई लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार हालात इतने बिगड़ गए कि पिता को नई दिल्ली में अपनी संपत्ति बेचकर बेटे को लेकर गांव आना पड़ा। वह आज भी नशा ले रहा है। बेटे की इस हालत से माता-पिता और अन्य सभी परिजन परेशान हैं।
केस दो :
जनपद की सीमा पर बसे एक गांव के व्यक्ति का पांच वर्ष पूर्व ट्रांसपोर्ट का अच्छा कारोबार था। परिवार के लिए सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन कारोबारी की शराब की लत ने उसे तीन वर्ष में ही दिवालिया बना दिया। सुबह से शाम तक शराब के नशे में धुत रहने से उसका कारोबार चौपट हो गया। घर में आए दिन मार-पिटाई आम बात हो गई। अब उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
केस तीन :
शराब की लत ने एक युवक का करियर छीनने के साथ ही उसे दिव्यांग भी बना दिया। दो वर्ष पूर्व युवक सेना में भर्ती होने के लिए अपने तीन दोस्तों के साथ घर से निकला। वह भर्ती में शामिल हुआ और चयनित भी हो गया। उसे ज्वाइनिंग पत्र का इंतजार था, लेकिन दोस्तों के साथ हुई पार्टी ने उसके जीवन में जहर घोल दिया। पार्टी में मात्रा से अधिक शराब पीने से वह एक बड़ी दुर्घटना का शिकार होकर अपंग हो गया। दुर्घटना में उसके एक साथी की मौत भी हो गई। परिजन आज तक इस घटना से उबर नहीं पाए हैं।
स्मैक का नशा भी पसार रहा पैर
जिले के कई क्षेत्रों में स्मैक का नशा भी तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही बाजारों से दूर सुनसान जगहों पर सफेदा, बाम, भांग के पत्ते व गिट्टी सहित पेपर सिगरेट के साथ नशे के लिए पेट्रोल आदि का सेवन करने वालों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही है। कई युवा तो प्रतिबंधित नशे की गोलियों का सेवन कर रहे हैं।
विधायक पर भी हो चुका हमला
अवैध शराब का विरोध करने पर बीते वर्ष कुछ लोगों द्वारा केदारनाथ विस के विधायक मनोज रावत पर भी जानलेवा हमला किया गया था। उनका कहना था कि क्षेत्र में काफी समय से अवैध शराब की सप्लाई की जा रही है, जिसका युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
75 मामलों में 79 लोगों को पकड़ा
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में जनपद रुद्रप्रयाग में अवैध शराब की बिक्री के 75 मामलों में 79 लोगों को पकड़ा गया था। साथ ही शराब की सप्लाई में उपयोग किए जाने वाले 24 वाहन भी सीज किए गए हैं।
जिला अस्पताल में हर माह नशे से पीड़ित 25 से 30 मरीज पहुंचते हैं। इनमें शराब और भांग के मामले सबसे अधिक हैं। पिछले कुछ समय से अन्य नशा सेवन के मामले में भी आए हैं। देखादेखी के चलते पहले किशोर/युवा शौकिया तौर पर नशा करते हैं, बाद में वे आदी हो जाते हैं, जिससे छुटकारा दिलाने के लिए नियमित काउंसलिंग और उपचार जरूरी है।
-राजीव गैरोला, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग
जनपद में नगर से लेकर गांवों तक अवैध शराब की तस्करी को रोकने के लिए सभी थाना और चौकियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हाईवे और थाना-चौकी से लगे संपर्क मोटर मार्गों पर गश्त बढ़ाई जा रही है।
-नवनीत सिंह, पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग