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'कुर्सी' के लिए BJP में तकरार, अंडर ग्राउंड हुए बड़े नेता
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 21 Oct 2015 04:06 PM IST
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अनुशासित होने का दंभ भरने वाली भाजपा में संगठन चुनाव में विभिन्न गुटों के दबाव, पक्षपात, विरोध की बात प्रमाणित हो गई है।
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देहरादून में डोईवाला ग्रामीण मंडल के चुनाव के बहाने गुटबाजी एक बार फिर सामने आ गई। प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, प्रदेश चुनाव अधिकारी केदार जोशी समेत तमाम बड़े धुरंधर भूमिगत है। पूरे मामले में प्रदेश महामंत्री (संगठन) की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध हो गई है। क्योंकि डोईवाला ग्रामीण में भी वहीं ड्रामा हुआ जो धर्मपुर में हुआ था।
2017 की बड़ी लड़ाई लड़ने का खम ठोंकने वाले भाजपा के नेता छोटी जंग में उलझ गए। कहां भाजपा विधानसभा चुनाव में हरीश रावत सरकार को परास्त करने का दावा कर रही है और कहां मंडल के चुनाव में बिगड़ी परिस्थिति नियंत्रित करने कोई नेता आगे नहीं आया।
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दरअसल, मंडल अध्यक्षों की लड़ाई तो कई जगह चल रही है, लेकिन डोईवाला ग्रामीण मंडल में राजेंद्र तड़ियाल के विरोध में जनमत होने के बावजूद अध्यक्ष बनाने का दाव भी मंगलवार को उल्टा पड़ गया। भारी विरोध के बाद फैसला तो वापस ले लिया, लेकिन बिगड़ी स्थिति में सुधार नहीं आया। इस मंडल को निशंक कैंप ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है, लेकिन क्षेत्र में पनपे आक्रोश ने बाजी पलट दी।
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पूरे एपिसोड में खास बात यह है कि दिन भर चले धरने प्रदर्शन के दौर के बाद प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह का कहीं अता पता नहीं रहा। उनके मोबाइल पर घंटी जाती रही, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रदेश चुनाव अधिकारी केदार जोशी तो तड़ियाल की नियुक्ति करने के साथ ही दो दिन पहले भूमिगत हो गए थे। इसके अलावा प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार भी अंडरग्राउंड ही रहे। बड़े नेताओं ने पार्टी में उठे आक्रोश को अपने हाल पर छोड़ दिया।
किसके दबाव में मंडल अध्यक्ष घोषित किया?
लाख टके का सवाल यह है कि जिस केदार जोशी पर पारदर्शिता के साथ चुुनाव कराने का जिम्मा है, उसने किसके दबाव में डोईवाला ग्रामीण मंडल अध्यक्ष घोषित किया। क्योंकि धर्मपुर ग्रामीण के बाद अब डोईवाला ग्रामीण मंडल ने भी प्रदेश चुनाव अधिकारी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध कर दी है।
संघ भी आया निशाने पर
जिस तड़ियाल को डोईवाला ग्रामीण मंडल का अध्यक्ष बनाने को लेकर झगड़ा हुआ, उसे बनाने के पीछे संघ का दबाव भी माना जा रहा है।
क्योंकि पिछले सप्ताह जिन दो तीन मामलों को लेकर आरएसएस के प्रांत कार्यवाह लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल के साथ पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे थे, उनमें सबसे अहम मुद्दा तड़ियाल की ताजपोशी कराना ही था। इसलिए भाजपा में इस बात को लेकर भी नाराजगी है।