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आपदा प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों पर हुई चर्चा
देहरादून/ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2013 06:45 PM IST
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उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) की ओर से इको एंड वाश फ्यूचर्स प्रोग्राम की 16वीं तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक यहां वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) परिसर में शुरू हुई।
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पहले दिन ‘जल संसाधन शिक्षण एवं प्रशिक्षण’ विषय पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला हुई। ‘मिटिगेशन डिजास्टर्स : रोल आफ साइंस इंस्टीट्यूशंस’ व्याख्यान के जरिए यूकास्ट के महानिदेशक डा. राजेंद्र डोभाल ने आपदा प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों पर प्रकाश डाला।
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नेटवर्किंग मोड में कार्य करना आवश्यक
उन्होंने विभिन्न संस्थानों के इसमें योगदान को महत्वपूर्ण करार दिया। कहा कि आपदा से होने वाली क्षति को कम करने के लिए विभिन्न संस्थानों का नेटवर्किंग मोड में कार्य करना आवश्यक है।
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कार्यशाला के दूसरे सत्र में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. आरपीबी सिंह ने एजुकेशन फार प्लेस बेस्ड इको लिटरेसी-ए क्वेस्ट फ्राम द इंडियन जियो रूट पर तकनीकी जानकारी दी।
वाटर एजुकेटर्स के रोल
नर्मदा कंट्रोल अथारिटी इंदौर के इंपेक्ट एसेसमेंट एंड रिहेबिलिटेशिन के निदेशक डा. अफरोज अहमद ने जल संसाधनों के प्रबंधन में वाटर एजुकेटर्स के रोल पर प्रकाश डाला। डा. अरविंद जोशी ने आजीविका प्रोजेक्ट की सफलता की कहानी कही।
इस दौरान तकनीकी सलाहकार समिति के चेयरमैन प्रो. जीएस रुनवाल, यूकास्ट के जिला समन्वयक डा. प्रशांत सिंह, डा. मीनू तलवार, डा. अजय कुमार, श्रद्धा पंत, डा. बालकृष्ण गौडा, रामकृष्ण, मान सिंह ठाकुर आदि उपस्थित रहे।