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आपदा : पांच जिलों में माॅक ड्रिल से परखी गईं तैयारियां
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- आज शेष आठ जिलों में होगी माॅक ड्रिल
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत पहली बार जिला स्तर पर बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में मॉक ड्रिल की गई और यूएसडीएमए ने माॅनीटरिंग की। माॅक ड्रिल से संभावित आपदा की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता, राहत व बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन किया गया।
माॅक ड्रिल में विभिन्न परिदृश्यों जैसे भूकंप, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़, वनाग्नि एवं अन्य आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया। इस दौरान पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रभावितों के सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत वितरण की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।
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भूस्खलन और तेंदुए के हमले जैसे परिदृश्यों पर आधारित अभियान आयोजित
बागेश्वर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप, भूस्खलन, आग एवं वन्यजीव हमले जैसी परिस्थितियों का यथार्थपरक प्रदर्शन किया गया। रुद्रप्रयाग में भूकंप, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना व वनाग्नि का अभ्यास हुआ। पौड़ी में चार अलग-अलग स्थानों पर नदी के जलस्तर में वृद्धि, भूस्खलन, बस दुर्घटना एवं वनाग्नि के परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। उत्तरकाशी में मनेरी भाली परियोजना-एक में बांध से रिसाव की स्थिति को दर्शाते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई का अभ्यास हुआ। नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र स्थित चार्टन लॉज में भूस्खलन की स्थिति दर्शाते हुए प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की माॅक ड्रिल की गई।
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मॉक अभ्यास से तैयारियों की वास्तविक स्थिति का पता चलता : सुमन
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास न केवल हमारी तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करते हैं। आपदा की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित, संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत पहली बार जिला स्तर पर बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में मॉक ड्रिल की गई और यूएसडीएमए ने माॅनीटरिंग की। माॅक ड्रिल से संभावित आपदा की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता, राहत व बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन किया गया।
माॅक ड्रिल में विभिन्न परिदृश्यों जैसे भूकंप, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़, वनाग्नि एवं अन्य आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया। इस दौरान पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रभावितों के सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत वितरण की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।
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भूस्खलन और तेंदुए के हमले जैसे परिदृश्यों पर आधारित अभियान आयोजित
बागेश्वर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप, भूस्खलन, आग एवं वन्यजीव हमले जैसी परिस्थितियों का यथार्थपरक प्रदर्शन किया गया। रुद्रप्रयाग में भूकंप, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना व वनाग्नि का अभ्यास हुआ। पौड़ी में चार अलग-अलग स्थानों पर नदी के जलस्तर में वृद्धि, भूस्खलन, बस दुर्घटना एवं वनाग्नि के परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। उत्तरकाशी में मनेरी भाली परियोजना-एक में बांध से रिसाव की स्थिति को दर्शाते हुए निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई का अभ्यास हुआ। नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र स्थित चार्टन लॉज में भूस्खलन की स्थिति दर्शाते हुए प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की माॅक ड्रिल की गई।
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मॉक अभ्यास से तैयारियों की वास्तविक स्थिति का पता चलता : सुमन
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास न केवल हमारी तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करते हैं। आपदा की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित, संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना आवश्यक है।