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आपदा से बचाने के लिए ग्लेशियरों की निगरानी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Mar 2015 10:14 AM IST
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प्रदेश में केदारनाथ जैसी आपदा फिर न हो, इसके लिए केंद्रीय जल आयोग और प्रदेश सरकार पिघलते हिमखंडों के जलस्तर पर नजर रखने की कवायद शुरू कर रहे हैं। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में पांच हाइड्रोमेट साइट्स (निगरानी केंद्र) स्थापित किए जाएंगे। बर्फ कम होते ही मई में योजना का पहला चरण प्रारंभ हो जाएगा।
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करीब दो वर्ष पूर्व केदारनाथ आपदा में प्रदेश के बड़े हिस्से में बड़ी तबाही हुई थी। इसकी मुख्य वजह केदारनाथ धाम से ठीक ऊपर स्थित चोराबाड़ी ग्लेशियर स्थित झील के फटने को बताया गया था।
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प्रदेश में होंगे पांच निगरानी केंद्र
ऐसे में अब केंद्रीय जल आयोग प्रदेश में संवेदनशील हिमखंडों (ग्लेशियरों) पर नजर रखेगा। योजना के तहत पांच निगरानी केंद्र बनाकर हिमखंडों से नदियों में आने वाले पानी के जलस्तर का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा। किसी भी वक्त स्थिति बिगड़ने की आशंका पर तुरंत राज्य सरकार को सूचित किया जाएगा, ताकि राहत-बचाव के जरूरी कदम उठाए जा सकें।
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यहां बनेंगे केंद्र
बद्रीनाथ के पास चीन सीमा स्थित माणा गांव, केदारनाथ क्षेत्र में गुप्तकाशी, बागेश्वर में खाती गांव, उत्तरकाशी में गोमुख ग्लेशियर और टिहरी में गंगी।
इनका है कहना
पहले चरण में इन पांच केंद्रों पर मई में बर्फ पिघलने के साथ ही काम शुरू किया जाएगा। इनमें दर्ज होने वाला पूरा डाटा सैटेलाइट के जरिये केंद्रीय जल आयोग को मिलता रहेगा।
-पीयूष कुमार, अधीक्षण अभियंता, केंद्रीय जल आयोग।