उत्तराखंड: राज्यसभा के लिए धीरेंद्र का दावा, लिखी चिठ्ठी
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राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने मनोरमा शर्मा के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर दावा ठोका है। धीरेंद्र ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पत्र लिखकर आंदोलनकारी को टिकट देने की मांग की है।
डालनवाला स्थित परिषद कार्यालय में मंगलवार को धीरेंद्र ने कहा कि यह पद मनोरमा शर्मा के निधन के बाद खाली है। वे भी आंदोलनकारी थीं। अब इसके लिए फिल्म इंडस्ट्री, पूर्व सांसदों और बाहरी नेताओं का नाम सामने आ रहा है।
मंगलवार से नामांकन शुरू है। आंदोलनकारियों का सम्मान करते हुए कांग्रेस राज्य आंदोलनकारी को टिकट दे। धीरेंद्र ने टिकट के लिए खुद का दावा पेश करते हुए कहा कि पिता-दादा सभी आंदोलनकारी थे। खुद भी वह 500 से अधिक बार गिरफ्तार हुए। परिवार के 9 सदस्य जेल गए थे, लिहाजा उनका दावा अधिक मजबूत है।
बजट सत्र में रखेंगे 10% आरक्षण का मुद्दा
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य के युवा पीसीएस समेत अन्य सेवाओं में जा रहे हैं, लेकिन आंदोलनकारियों को आरक्षण का फायदा नहीं मिल पा रहा है। बजट सत्र में 10 फीसदी आरक्षण का मुद्दा सदन में रखने का सरकार ने फैसला लिया है।
शहीद स्मारक की समय बदला
धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि सभी जगह शहीद स्मारकों के दर्शन का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे किया गया है। सूत्रों की मानें तो बीते दिनों आंदोलनकारियों के रात के वक्त पेड़ पर चढ़ने और शहीद स्मारक पर रहने की घटनाओं को देखते हुए यह किया गया है।
आंदोलनकारियों को आर्थिक मदद
आंदोलनकारियों को सरकार ने आर्थिक मदद की पेशकश की है। धीरेंद्र ने बताया कि आंदोलनकारी चंद्रशेखर जोशी को 70 हजार रुपये मदद दी गई। खराब आर्थिक स्थिति वाले अन्य आंदोलनकारी भी आवेदन कर सकते हैं।
विधानपरिषद गठन की मांग
धीरेंद्र ने उत्तराखंड में विधानपरिषद गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि साल 2000 में राज्य गठन के बाद 21 सदस्यीय विधान परिषद बनाने की योजना थी, जो आज तक नहीं बन सकी।
इसके लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत से मांग की गई है। इसमें कवि, लेखक, गायक, संस्कृति कर्मी, पत्रकार आदि को जगह मिल सके।
दो स्तर पर पेंशन योजना
धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के लिए एक सप्ताह में समिति बनाई जाएगी। दिल्ली और एनसीआर में भी समिति बनप रही है। कहा कि आंदोलनकारियों को अब दो स्तर पर पेंशन दी जाएगी। पहली जो एक सप्ताह जेल रहे या घायल हुए, उन्हें 5 हजार रुपये मिल रही है। दूसरे स्तर पर 60 वर्ष की उम्र सीमा घटाकर 50 साल किया जा रहा है।