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राज्यसभा में गूंजा डीजीपी बीएस सिद्धू का नाम
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Jul 2014 12:12 PM IST
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मसूरी वन प्रभाग की वीरगिरवाली वन रेंज में रिजर्व फारेस्ट लैंड का मामला गुरुवार को राज्यसभा में भी गूंजा।
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खास बात यह रही कि केंद्र सरकार ने भी राज्यसभा में स्वीकार किया कि यह जमीन अवैध रूप से खरीदी गई थी।
डीजीपी बीएस सिद्धू से जुड़ा है मामला
आपको बता दें कि रिजर्व फारेस्ट का यह मुद्दा प्रदेश के मौजूदा डीजीपी बीएस सिद्धू से जुड़ा है। वीरगिरवाली वन रेंज में रिजर्व फारेस्ट की इस जमीन को सिद्धू ने ही खरीदा था।
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावडेकर ने सदन में रिजर्व फारेस्ट की जमीन को अवैध रूप से क्रय करने की बात स्वीकार करते हुए जानकारी दी कि मामला अभी भी विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है।
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सपा के राज्यसभा सदस्य अरविंद कुमार सिंह के अतारांकित प्रश्न संख्या 925 पर गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा हुई।
सिंह के देहरादून जनपद के मसूरी वन प्रभाग में वीरगिरवाली में रिजर्व फारेस्ट लैंड को अवैध तरीके से क्रय किए जाने के सवाल किया।
इस पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावडे़कर ने सदन इसकी स्थिति की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अवैध रूप से खरीदी जमीन की सेल डीड 21 नवंबर 2012 को हुई, इस रिजर्व फारेस्ट में साल के 25 पेड़ अवैध रूप से काटे गए।
विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है मामला
पेड़ों का कटान नौ मार्च व 18 मार्च 2013 को हुआ है। इससे जुड़ा मामला अभी भी उच्च न्यायालय नैनीताल, सीजेएम कोर्ट देहरादून व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।
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रिजर्व फारेस्ट में कथित रूप से खरीदी गई अवैध भूमि के मामले में वन विभाग व पुलिस ने स्वतंत्र रूप से जांच की गई, और रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी।
इस मामले में एक क्रिमिनल शिकायत सीजेएम कोर्ट में दाखिल की गई है, इस मामले में उत्तराखंड के मुख्य सचिव व केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में प्रतिशपथ पत्र भी दाखिल किया है।
फिलहाल यह मामला विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है।
डीजीपी बीएस सिद्धू से जुड़ा है मामला
वीरगिरवाली वन रेंज में रिजर्व फारेस्ट की इस जमीन को सिद्धू ने ही खरीदा था।
जब मामला मीडिया में उछला तो रजिस्ट्री व म्यूटेशन को जिला प्रशासन ने रद्द कर दिया और जमीन को रिजर्व फारेस्ट में समाहित करने के आदेश जिला मजिस्ट्रेट ने पारित किए।
फिलहाल, यह मामला सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है, चार दिन पहले मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने भी डीजीपी बीएस सिद्धू व डीएफओ धीरज पांडे को बुलाकर दोनों का पक्ष जाना, लेकिन बात नहीं बनी।