देहरादूनः डेंगू के 86 और मरीज सामने आए, संख्या 2269 पहुंची, राज्यपाल ने किया नगर आयुक्त को तलब
- देहरादून जिले में मरीजाें का आंकड़ा 2183 पहुंचा
- छह मरीजों की इलाज के दौरान हो चुकी है मौत
- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दून अस्पताल पहुंच जाना मरीजों का हाल
- कहा, डेंगू को लेकर नियमित तैयारियों में भी विफल रही राज्य सरकार
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विस्तार
देहरादून जिले में बृहस्पतिवार को 86 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें से अधिकतर शहरी क्षेत्र के मरीज हैं। इस तरह से सिर्फ देहरादून जिले मेें ही मौजूदा सीजन में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या 2269 पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में 270, गांधी शताब्दी अस्पताल में 92, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायपुर में 18 मरीजों के सैंपल की एलाइजा जांच रिपोर्ट आई है। जिसमें दून अस्पताल में 35, गांधी शताब्दी अस्पताल में 41 और सीएचसी रायपुर में 10 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
अब तक दून अस्पताल में 8874, गांधी शताब्दी अस्पताल में 994, कोरोनेशन अस्पताल में 508, एसपीएस ऋषिकेश में 338 और सीएचसी रायपुर में 18 मरीजों की एलाइजा जांच की जा चुकी है। इस तरह से पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में मौजूदा सीजन में अब तक 10732 मरीजों के रक्त सैंपल की एलाइजा जांच की जा चुकी है। जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि डेंगू की रोकथाम और उससे बचाव के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की कई टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जुटी हुई हैं। कई जगह जमा पानी में पनप रहे लार्वा को नष्ट करने के अलावा अलग-अलग स्थानों पर फॉगिंग भी की जा रही है।
रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की ली जानकारी, दिए निर्देश
राजधानी में लगातार बढ़ रहे डेंगू प्रकोप को रोकने के लिए नगर निगम के प्रयासों नाकाफी साबित हो रहे है। इसी के चलते गुरुवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय को तलब किया। उन्होंने नगर आयुक्त को राजधानी में साफ. सफाई की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे उपायों की जानकारी भी ली।
राज्यपाल ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि योजनाबद्ध तरीके से वार्डों में नियमित फागिंग करवाई जाए। विशेष टीमें बनाकर एक संपूर्ण वार्ड में एक ही दिन में एक साथ फागिंग करवाने की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही राजधानी में नालों की सफाई पर ध्यान दें। कचरा प्रबंधन में हीलाहवाली से अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी रहता है। इसलिए कूड़ा निस्तारण को प्राथमिकता दी जाय। मांस विक्रेताओं की दुकानों और आसपास के स्थानों का सफाई की दृष्टि से नियमित निरीक्षण किया जाय। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने राज्यपाल को बताया कि निकाय में 110 पोर्टबल फागिंग मशीन एवं कुल 300 स्प्रे मशीन उपलब्ध हैं। प्रत्येक वार्ड के लिए एक फागिंग मशीन एवं तीन स्प्रे मशीन संबंधित क्षेत्र के सफाई नायक या सफाई निरीक्षक को उपलब्ध कराई गई हैं। आठ बड़ी फागिंग मशीनों को चार वाहनों में लगाकर नियमित रूप से वार्ड वार एवं शिकायत प्राप्त होने पर प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम देहरादून में मार्च 2019 से अगस्त 2019 तक 63 लाख रुपये का ईंधन फागिंग पर व्यय हो चुका है। नगर निगम के दूरभाष नंबर 0135-2652571 को डेंगू नियंत्रण के लिए जन शिकायत प्राप्त करने में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम के टाल फ्री नंबर 112 के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों को सफाई निरीक्षक राजेश बहुगुणा देख रहे हैं। सूचना प्राप्त होते ही संबंधित क्षेत्र के सफाई नायक एवं निरीक्षक से तत्काल उसे निस्तारित करने की व्यवस्था बनायी गई है।
डीजी व निदेशक ने किया अस्पतालों का निरीक्षण
सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मरीजों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी फील्ड में उतर गए हैं। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.आरके पांडे और निदेशक डॉ.अमिता उप्रेती ने डेंगू मरीजों को मिल रहे उपचार की वास्तविक स्थिति परखने के लिए देहरादून, ऋषिकेश, डोईवाला में सरकारी और निजी अस्पतालों का दौरा किया। डेंगू को नियंत्रण करने के लिए शासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को मिल रहे उपचार की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.आरके पांडे की अगुवाई में टीम ने दून अस्पताल, कोरोनेशन समेत निजी अस्पतालों का दौरा किया। जबकि स्वास्थ्य निदेशक डॉ.अमिता उप्रेती ने एम्स ऋषिकेश के मेडिसिन, माइक्रो बायोलॉजी और कम्युनिटी मेडिसिन विभागों का दौरा कर डेंगू के मरीजों को दिए जा रहे इलाज के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट और डोईवाला राजकीय चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि निजी पैथोलॉजी और क्लीनिक के माध्यम से दी जा रही सेवाओं की नियमित रूप से निगरानी की जाए। इस मौके पर सहायक निदेशक डॉ.पंकज कुमार और डॉ.अखिलेश त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
स्वाइन फ्लू की आहट पर महकमा ‘अलर्ट’
डेंगू को लेकर मचे हाहाकार के बीच स्वाइन फ्लू की आहट को लेकर महकमा अलर्ट हो गया है। राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में बृहस्पतिवार को हुई आपात बैठक में स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारी की समीक्षा के साथ जरूरी कदम उठाने के निर्णय लिए गए। सिनर्जी अस्पताल में भर्ती 49 वर्षीय एक मरीज की जांच में 17 सितंबर को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। इस मामले ने डेंगू से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को दून अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डा. केके टम्टा ने विशेषज्ञ डाक्टरों, फार्मासिस्टों, नर्सेस और अन्य स्टाफ की बैठक ली।
डा. टम्टा ने बताया कि अस्पताल में शुरुआत में 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा एक हजार मास्क की खरीद के लिए टेंडर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए एंटी वायरल दवा टैमी फ्लू पर्याप्त मात्रा में अस्पताल में उपलब्ध है। बैठक में मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. नारायणजीत सिंह, बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. तन्वी सिंह, श्वास रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. श्वेताभ पुरोहित, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र सिंह भंडारी, नर्सिंग अधीक्षक सतीश धस्माना, वरिष्ठ रामेश्वरी नेगी, अंजना नोक्स, फार्मासिस्ट सुधा कुकरेती आदि मौजूद रहे।
कोरोनेशन में भी बनेगा आइसोलेशन वार्ड
कोरोनेशन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीसी रमोला ने बताया कि उन्होंने अस्पताल में 15 बेड के आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही स्वाइन फ्लू की दवा भी मंगाई जा रही है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केके टम्टा ने बताया कि वार्डों में ड्यूटी करने वाले डाक्टरों व अन्य स्टाफ को वैक्सीन भी लगाई जाएगी। वसंत विहार निवासी पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट एवं छाती रोग विशेषज्ञ डा. परवेज अहमद ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों के संपर्क में रहने से भी यह बीमारी हो सकती है। इसलिए स्वाइन फ्लू की वैक्सीन लगाई जाती है। हालांकि यह वैक्सीन 92 प्रतिशत तक रोग से बचाव करती है। यह वैक्सीन किसी व्यक्ति को लगाने के चार हफ्ते बाद शरीर में इम्यूनिटी बनाती है, यानि सक्रिय होती है। स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर योग्य डाक्टर को दिखाएं, घर पर आराम करें और अपनी मर्जी से कोई दवा न लें।
आखिर क्या हैं डेंगू बीमारी के लक्षण
मरीज को तेज बुखार (105 फारेनहाइट तक) होता है।
गंभीर सिर दर्द होता है
मरीज के हड्डियों, शरीर के सभी जोड़ व मांसपेशियों में गंभीर दर्द होता है।
मरीज को चक्कर आने लगता है।
मरीज को उल्टियां शुरू हो जाती है।
स्थिति गंभीर होने पर मसूड़ों व नाक से खून आने लगता ह्रै।
डेंगू, मलेरिया से कैसे करें बचाव?
जहां भी पानी जमा हो, उसमें मिट्टी का तेल, डीजल या जला मोबिल डाल दें।
घर के आसपास पानी जमा हो तो उसमें नीम की पत्ती, नीमकौड़ी डाल दें।
घर में पोछा लगाने के लिए फिनायल का इस्तेमाल करें।
शाम होने के बाद पूरी आस्तीन का कपड़ा पहनें। हाथ पैर कतई खुला न छोड़े।
कूलर हटाने के साथ ही पानी निकाल दें।
संभव हो तो मच्छरदानी लगाकर सोएं।
डेंगू पर हरीश रावत ने बोला सरकार पर हमला
डेंगू पीड़ितों का हाल जानने दून अस्पताल पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि डेंगू को लेकर सरकार नियमित तैयारियों में पूरी तरह विफल हो चुकी है। पिछले साल भी डेंगू की भयावह स्थिति थी। सरकार इससे सबक लेती और समय पर तैयारी करती और स्थिति महामारी जैसी न होती। हालांकि, इस दौरान उन्होंने दून अस्पताल की व्यवस्था को संतोषजनक बताया।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने हरीश रावत को डेंगू वार्ड का मुआयना कराया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने सामान्य वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत की। इस दौरान मरीजों ने वहां के इलाज के बारे में उनसे कोई शिकायत नहीं की। डॉ. केके टम्टा ने उन्हें बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो बेडों की संख्या बढ़ा दी जाएगी।
एनआरसी की बात से विफलताएं छुपा रही सरकार
हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री एनआरसी के मुद्दे को सामने कर सरकार की विफलताओं को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनआरसी का कांसेप्ट कांग्रेस का था। भाजपा उस समय असम में करोड़ों बंग्लादेशियों की घुसपैठ की बात उठा रही थी। लेकिन, एनआरसी का काम पूरा हुआ तो यह बात झूठ साबित हुई।
डेंगू मरीजों का मजाक उड़ा रही सरकार
हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने बयानों से डेंगू मरीजों का मजाक उड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है न कि इधर उधर की बातें करने की। उनका इशारा सीएम के उस बयान की ओर था जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रीतम सिंह के आसपास दो साल से डेंगू का एक मच्छर मंडरा रहा है, जिससे वे कार्यकारिणी तक का भी गठन नहीं कर पाए हैं।
देवप्रयाग में भी डेंगू की दस्तक, नौ मरीजों में हुई पुष्टि
संगम नगरी देवप्रयाग में भी डेंगू ने दस्तक दे दी है। यहां 9 मरीजों में डेंग की पुष्टि हुई हैं। डेंगू की चपेट में सबसे अधिक वाल्मीकि बस्ती के छह लोग शामिल है। वहीं श्रीनगर में मेडिकल कॉलेज और संयुक्त अस्पताल मेें रोजाना डेंगू से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में 6 मरीजों का उपचार चल रहा है। दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज में डेंगू परीक्षण किट समाप्त हो गई है, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों में परीक्षण करवाना पड़ रहा है।
देवप्रयाग नगर क्षेत्र में भी डेंगू का प्रकोप बढ़ गया है। नगर के वार्ड एक के कई लोगों को मंगलवार व बुधवार को तेज बुखार के साथ कमजोरी महसूस होने लगी। सीएचसी देवप्रयाग के चिकित्सकों के परामर्श पर उनकी खून की जांच की गई। जांच में उनमें डेंगू की पुष्टि हुई है। सीएचसी प्रभारी डा. सतीश कुमार ने बताया कि दो दिनों में लगभग 9 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है, जिनमें तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जबकि शेष मरीजों को दवा दी गई है।
उन्होंने बताया कि डेंगू के सर्वाधिक मामले तहसील वार्ड स्थित वाल्मीकि बस्ती के है। पालिका सभासद रुपेश गुसांई ने रोष जताया कि पालिका के पास सब कुछ संसाधन होने के बावजूद मच्छरों से निपटने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
वहीं, पालिका के अधिशासी अधिकारी बीएस बिष्ट का कहना है कि कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने लोगों को अपने घरों के आसपास सफाई रखने की अपील की है। दूसरी ओर गोपेश्वर में जिला अस्पताल में भर्ती एक मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण मिले हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज को डेंगू वार्ड में रखा गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनूप कुमार डिमरी ने बताया कि मरीज का एलाइजा टेस्ट किया जाएगा। इसी के बाद मरीज में डेंगू की पुष्टि होगी। बताया कि चमोली जिले में किसी भी व्यक्ति में डेंगू बुखार की पुष्टि नहीं हुई है। बाहर से जिले में पहुंच रहे लोगों में डेंगू बुखार के लक्षण मिल रहे हैं। जिन्हें इलाज दिया जा रहा है।