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सावधानः खतरनाक हुआ डेंगू, अब किडनी-लीवर पर भी कर रहा अटैक

Thu, 22 Aug 2019 12:29 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 22 Aug 2019 12:29 PM IST
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Dengue attack on kidney and liver
प्रतीकात्मक

देहरादून शहर में डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसका बुखार अब खतरनाक होने लगा है। बुखार बिगड़ने पर यह किडनी और लीवर के लिए भी खतरा बन रहा है। इस तरह के मरीज अब लगातार अस्पताल में पहुंच रहे हैं। 

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इस सीजन में शुरुआती दौर में डेंगू का बुखार ज्यादा खतरनाक नहीं हो रहा था। मरीजों को एक-दो दिन भर्ती करने के बाद चिकित्सक घर भेज रहे थे। कुछ मरीजों को ओपीडी से ही जांच के बाद जरूरी परामर्श देकर घर पर दवा लेने और आराम और एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही थी। लेकिन, अब डेंगू का बुखार खतरनाक स्तर तक पहुंचने लगा है।
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हालत यह है कि जरा सी लापरवाही हुई नहीं कि यह किडनी, लीवर और फेफड़ों पर असर डालने लगा है। इस तरह के मरीज भी अब अस्पताल में पहुंच रहे हैं। गांधी शताब्दी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीण पंवार के मुताबिक, इलाज में देरी और लापरवाही के चलते कई बार यह शरीर के दूसरे अंगों खासकर किडनी पर दुष्प्रभाव डालने लगता है। इसलिए डेंगू को हल्के में न लेकर विशेषज्ञ डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।
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10 और मरीजों में डेंगू की पुष्टि

देहरादून जिले में 10 और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें पांच पुरुष और पांच महिला मरीज हैं। इस तरह से जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या 481 पहुंच गई है। निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में डेंगू से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग को इसकी रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। ऐसे में डेंगू से पीड़ित मरीजों का यह सरकारी आंकड़ा असल मरीजों की संख्या से बहुत कम बताया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि सभी निजी अस्पतालों को कहा गया है कि एलाइजा जांच के लिए सैंपल दून अस्पताल भेजें। दून अस्पताल के अलावा हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट की लैब ही एलाइजा जांच के लिए मान्य है।

उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को भी जागरूकता अभियान जारी रखा। टीम ने आदर्श कालोनी, नेहरू ग्राम में 50 घरों का भ्रमण किया। अधिकांश घरों में लगे हुए कूलरों, खुली हुई टंकियों और क्षेत्र में बिखरे प्लास्टिक डिस्पोजल आदि में रुके हुए पानी में डेंगू मच्छर का लार्वा पनप रहा है। टीम ने स्थानीय लोगों के सहयोग से लार्वा नष्ट कराया। विभाग ने वहां स्वास्थ्य शिविर भी लगाया। शिविर में वायरल बुखार के रोगियों को दवा बांटी गई। 19 रोगियों का ब्लड सेंपल जांच के लिए लिया गया। जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

इमरजेंसी में भी रखने पड़ रहे मरीज

डेंगू बुखार इस कदर फैल रहा है कि सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में इससे पीड़ित भर्ती हैं। इसके अलावा वायरल के मरीज भी बड़ी संख्या में लगातार भर्ती हो रहे हैं। शहर के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर नजर डालें तो भयावहता का अंदाजा लग जाएगा। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बात करें तो यहां डेंगू मरीजों को भर्ती करने के लिए 26 बेड के तीन आइसोलेशन वार्ड बनाए हुए हैं। यह सभी फुल हैं।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि इस समय अस्पताल के सभी वार्ड फुल हैं। डेंगू मरीजों के लिए पांच और बेड की व्यवस्था की जा रही है। गांधी शताब्दी अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड के 24 बेड और कोरोनेशन अस्पताल के नौ बेड डेंगू मरीज से फुल हैं। गांधी शताब्दी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि डेंगू के तीन मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया है।

नोडल अफसर को ही डेंगू

डेंगू पीड़ितों की देखरेख और अन्य व्यवस्थाएं देखने के लिए दून अस्पताल ने एक डॉक्टर को नोडल अफसर बनाया है। लेकिन इस समय नोडल अफसर खुद डेंगू से पीड़ित हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि नोडल अफसर को डेंगू हो गया है। इसलिए अब दूसरे डॉक्टर और वे खुद समय-समय पर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार।
सिर, पेट मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द।
बहुत ज्यादा कमजोरी लगना और भूख न लगना।
शरीर पर चकते पड़ना, हाथ-पैर ठंडे पड़ने, बार-बार उल्टी होना, जी मिचलाना।
बेहोशी छाने और हालत गंभीर होने पर मुंह-नाक से खून निकलना।
(दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसडी जोशी से बातचीत पर आधारित)

डेंगू से बचाव

घर, स्कूल और कार्यालयों के कूलर, फ्रिज व गमलों आदि में ज्यादा दिन तक पानी जमा न रहने दें।
फुल बाजू की कमीज, फुल पैंट, सलवार, ट्राउजर आदि पहनें।
शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाकर रखें।
सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
डेंगू के प्राथमिक लक्षण दिखने पर खुद दवा लेने की बजाय किसी अच्छे चिकित्सक को दिखाएं।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार, जांच कराएं और दवा लें।
डेंगू के दौरान शरीर में पानी की कमी नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए मरीज को समय-समय पर पानी पिलाते रहें।
छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी लाभदायक रहेगा। एंटी ऑक्सीडेंट के तत्वों से भरपूर कीवी, किशमिश जैसे फल व मेवें खाएं।
मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाना खाएं।

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