संक्रमित बीमारियों का इलाज करने वाले डॉक्टर को ही हो गया डेंगू, फिर भी देखे 200 से अधिक मरीज
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डेंगू का इलाज करने वाले हरिद्वार में नोडल अधिकारी एवं जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. संदीप टंडन को ही डेंगू ने अपनी चपेट में ले लिया है। जांच में उनकी प्लेटलेट्स 85 हजार तक पहुंच गई है। हालांकि डेंगू से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने ओपीडी करते हुए 200 से अधिक मरीजों को परामर्श दिया। उनका कहना है कि उन्हें देहरादून में डेंगू का संक्रमण हुआ है।
देहरादून में डेंगू विकराल रूप ले चुका है। हरिद्वार में दो मरीजों के मामले देहरादून से ही आए थे। अब देहरादून में रहकर हरिद्वार के जिला अस्पताल में ड्यूटीरत फिजीशियन डॉ. संदीप टंडन डेंगू से पीड़ित हो गए हैं। डॉ. संदीप टंडन संक्रमित बीमारियों के प्रभारी हैं और डेंगू के नोडल अधिकारी हैं।
फिलहाल वे ही डेंगू से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने डेंगू के लक्षण स्वयं में पाते हुए जिला अस्पताल में पहुंचकर प्लेटलेट्स की जांच कराई, जांच में उनकी प्लेटलेट्स 85 हजार आई ।
डेंगू से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने बृहस्पतिवार को पूरे दिन ओपीडी कर करीब 200 मरीज देखे। उन्होंने बताया कि डेंगू होने पर कोई खास इलाज तो नहीं है, लेकिन जब तक स्वस्थ महसूस कर रहे हैं तब तक मरीजों की सेवा करते रहेंगे।
आईसोलेशन वार्ड में नहीं है कोई इंतजाम
जिला अस्पताल में डेंगू से पीड़ित मरीजों के लिए 8 बेड का आईसोलेशन वार्ड बनाया है, लेकिन वार्ड में बेड पर मच्छरदानी तक नहीं लगाई गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार ने बताया कि फिलहाल पीड़ित मरीज को भर्ती करने का मामला नहीं है, जैसे ही मरीज भर्ती होगा उसके लिए मच्छरदानी लगा दी जाएगी।
देहरादून में 102 पहुंची डेंगू मरीजों की संख्या
बृहस्पतिवार को देहरादून में डेंगू के आठ और मरीज सामने आए हैं। इस तरह से जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 102 हो चुकी है। इनमें अधिकतर रायपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी सुभाष जोशी ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्वास्थ्य विभाग की टीम नजर रख रही है।
साथ ही नगर निगम की टीम भी वहां पर फॉगिंग कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को जहां भी जलभराव या गंदगी नजर आ रही है, इस बारे में नगर निगम को सूचित किया जा रहा है। आशाएं भी घर-घर जाकर डेंगू रोकथा के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि दून अस्पताल से लेकर जिले के सीएचसी और पीएचसी तक को सतर्क किया गया है। सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि डेंगू के प्राथमिक लक्षणों वाले मरीजों को रैपिड टेस्ट के लिए परामर्श दें। रैपिड टेस्ट पॉजीटिव आने पर दून अस्पताल में एलाइजा जांच कराएं।
गांधी शताब्दी अस्पताल में भी बनाया आइसोलेशन वार्ड
डेंगू मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रीतम रोड स्थित गांधी शताब्दी अस्पताल में भी आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में 24 बेड हैं। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि जरूरत हुई तो बेड की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने मेडिकल, पैरामेडिकल और नॉन मेडिकल स्टाफ को जरूरी दिशा निर्देश देते हुए एहतियात बरतने को कहा है। उन्होंने चेन्नई से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की बैठक ली है।
डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव को चलेगा अभियान
डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मलिन बस्तियों में जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इस बाबत मुख्य शिक्षा अधिकारी आशारानी पैन्यूली ने एनएसएस ईकाइयों को अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
आदेश में राबाइंका कारगी ग्रांट, अजबपुर कलां, राइंका किशनपुर, नालापानी, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय ननूरखेड़ा, दूधली, डीएवी इंटर कॉलेज करनपुर, एसजीआरआर नेहरूग्राम, पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला, राइंका माजरीग्रांट, सेलाकुई, रानीपोखरी, एसबीएम इंटर कॉलेज ऋषिकेश, आशाराम वैदिक इंटर कॉलेज विकासनगर, महर्षि विद्या मंदिर एसएसएस पौंधा, जनता इंटर कॉलेज मल्हान के राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र जारी कर आसपास के इलाकों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए 28 अलग-अलग मलिन बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।