ये क्या? देहरादून मेयर ने खोली उत्तराखंड सरकार की पोल
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उत्तराखंड सरकार के मलिन बस्तियों के नियमितीकरण के दावों की मेयर विनोद चमोली ने पोल खोल दी है।
नियमितीकरण को लाए गए अधिनियम का हवाला देकर मेयर ने कहा कि इससे केवल 28 बस्तियों ही नियमित हो पाएंगी। मेयर का दावा है कि एक्ट में इतनी खामियां है कि इससे जनता और आने वाली सरकार को परेशानी होगी। रविवार को प्रेस वार्ता में मेयर ने अधिनियम की खामियां गिनाई और इससे संबंधित आंकड़े भी मीडिया को उपलब्ध कराए।
रविवार को नगर निगम में आयोजित पत्रकार वार्ता में मेयर ने बताया कि दिसंबर 2011 में खंडूडी सरकार ने नियमितीकरण को पंडित दीनदयाल नीति बनाई थी। जिसको सरकार ने आगे बढ़ाकर सरकार ने 129 मलिन बस्तियों को नियमित करने का एलान किया है। पर नियमितीकरण के लिए बनाए गए एक्ट ने आम जनता को उलझा कर रख दिया है।
कहा कि एक्ट में नदी, नाले, खाले, निजी संपत्ति और विवादित जमीन पर बनी बस्तियों का नियमितीकरण नहीं होगा। उन्होंने अपने द्वारा कराए गए सर्वे की कापी मीडिया को उपलब्ध कराते हुए दावा किया कि 18 मलिन बस्तियां ऐसी है, जो निजी भूमि पर है। 58 बस्तियां नाले, खाले और जलमग्न जगह पर और आठ भूकंप जोन में बसी है।
ऐसे में केवल 28 बस्तियों का ही नियमितीकरण हो पाएगा। जबकि 30 मीटर से ऊपर पर सर्किल रेट का 25 प्रतिशत चुकाना होगा। जो लाखों में बैठेगा। यह रकम एक साल के अंदर चुकानी होगी। ऐसा न होने पर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। अब गरीब आदमी लाखों रुपये कहां से लाएगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सरकार का केवल चुनावी स्टंट है।
विधायक का मकान भी नहीं होगा नियमित
मेयर ने नियमितीकरण के बहाने विधायक राजकुमार पर भी चुटकी ली। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि तिवारी सरकार में बिंदाल और रिस्पना पुल पर जारी कब्जाधारियों की सूची में विधायक राजकुमार का भी नाम है। उन्होंने खसरा संख्या 544 पर नदी की आधा बीघा जमीन पर कब्जा किया है।
कहा कि अब उनकी सरकार ने एक्ट को इतना उलझा कर रख दिया है कि खुद नियमितीकरण के नाम पर लोगों से स्वागत करा रहे विधायक का मकान भी नियमित नहीं हो पाएगा। पूरी बस्ती की बात ही नहीं की जा सकती। उन्होंने विधायक पर आठ साल में मात्र 27 मलिन बस्तियों को ही चिन्हित करवा पाने पर भी सवाल उठाए। बताया कि साल 2008 में नगर निगम की समिति ने एक सर्वे किया था, जिसमें 102 बस्तियां चिन्हित की थी, समिति में खुद विधायक राजकुमार भी शामिल थे।
वन मंत्री और सीएम पर भी तल्खी
मेयर ने कहा कि वन मंत्री दिनेश अग्रवाल और मुख्यमंत्री नियमितीकरण पर रोजाना अलग अलग बयान देते है। नदियों, नालों और खालों की जद में आने वाली बस्तियों को लोगों की मालाएं पहन उनको न उजड़ने देने का भी आश्वासन देते है। और एक्ट में भी संशोधन नहीं कराते। आरोप लगाया कि सरकार की नीयत में खोट है। जो वह इस तरह हर जगह गिरगिट की तरह रंग बदलती है।
रीवर फ्रंट योजना पर खड़े किए सवाल
मेयर ने सरकार द्वारा बिंदाल और रिस्पना किनारे चलाई जा रही रीवर फ्रंट योजना पर भी सवाल खड़े किए। कहा कि सरकार ने बिना कोई कार्ययोजना बनाए नदी को नाला बना उस पर पुस्ता खड़ा कर रही है। कहा कि पूर्व में एक समिति अहमदाबाद में गई थी, वहां के माडल के अनुसार यह योजना अमल में लाई जानी थी। कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने को पैसे नहीं है। और करोड़ों में पूरी होने वाली रीवर फ्रंट जैसी योजना का सब्जबाग जनता को दिखा रहा है।