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उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए हॉट बनी कैंट सीट
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 16 Nov 2015 03:50 PM IST
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कांग्रेस में देहरादून की पांचों विधानसभा सीटों पर जीत के लिए चक्रव्यूह रचना के साथ ही चुनाव का शंखनाद हो चुका है।
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इन क्षेत्रों से विधायकी का टिकट चाहने वाले अपने-अपने तरीके से जनता के बीच पकड़ बनाने में जुटे हैं। धर्मपुर, राजपुर और रायपुर विस सीटों पर कांग्रेस के वर्तमान विधायकों के अलावा दूसरे दावेदार भी विधायकी का सपना देख रहे हैं।
वहीं, मसूरी और कैंट विधानसभा सीटों पर जहां पर भाजपा काबिज है, वहां भी कांग्रेस से टिकट के कई दावेदार सक्रिय हैं। लेकिन इन सब में सबसे अधिक दिलचस्प मुकाबला कैंट से देखने को मिल रहा है। यहां पर कांग्रेस से टिकट चाहने वाले कई हैं और सभी क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं।
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कैंट विधानसभा का अधिकतर हिस्सा पूर्व में देहराखास और दून शहर में शामिल था। इस क्षेत्र से इक्का-दुक्का नहीं बल्कि सात बार भाजपा के वरिष्ठ नेता हरबंस कपूर काबिज हैं।
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पिछले सात चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट, विनोद चंदोला, दिनेश अग्रवाल, संजय शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, संजय शर्मा और देवेंद्र सेठी को मौका दिया जा चुका है, लेकिन इनमें से कोई भी कामयाब नहीं हो सका।
इस बार यहां से पार्टी किसे टिकट देगी यह तो पार्टी हाईकमान तय करेगा, लेकिन विस क्षेत्र के 129 बूथ और 17 वार्ड अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया के साथ ही टिकट के दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
यहां से महानगर कांग्रेस अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान, मेयर का चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, दीप बोहरा सहित कुछ अन्य प्रत्यक्ष और परोक्ष अपनी दावेदारी जता चुके हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना के मुताबिक वह इस क्षेत्र से पिछले सात साल से निर्वाचित पीसीसी सदस्य हैं। धस्माना यह भी दावा करते हैं कि वह इस क्षेत्र में चार करोड़ की सड़कें मंजूर करा चुके हैं।
बसंत विहार, इंदिरा नगर, पंडितवाड़ी, द्रोणपुरी, गोविंदगढ़, कौलागढ़ में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए दो ट्यूबवेल लगवा चुके हैं।
धस्माना ने साल 2013 में मेयर के चुनाव में इस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के बराबर वोट हासिल किए थे। वहीं, प्रमुख दावेदारों में शामिल कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान महानगर में 120 बातचीत कार्यक्रम करा चुके हैं।
उनका खास फोकस कैंट और मसूरी विधान सभा क्षेत्र पर है। अपनी दावेदारी के बारे में उनका कहना है कि यह पार्टी को तय करना है, हाईकमान जो तय करेगा वही मान्य होगा।
बड़े स्तर पर चलाए जाएंगे कार्यक्रम
कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जनता में मजबूत पकड़ के लिए बातचीत कार्यक्रम के बाद अब लीड यूअर लीडर्स और आओ विचारें दो कार्यक्रम बड़े स्तर पर शुरू होने वाले हैं। युवाओं और रिटायर्ड लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए यह कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
कैंट विधायक हरबंस कपूर ने कब किसे हराया
- 1989 में हीरा सिंह बिष्ट
- 1991 में विनोद चंदोला
- 1993 में दिनेश अग्रवाल
- 1996 में दिनेश अग्रवाल
- 2002 में संजय शर्मा
- 2007 में लाल चंद शर्मा
- 2012 में देवेंद्र सेठी