सर्वे रिपोर्ट में खुलासा: दून में 61 फीसदी बेटे करते हैं बुजुर्ग माता-पिता का उत्पीड़न
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राजधानी दून में लगभग 80 फीसदी बुजुर्गों का उनकी संतान और परिवार के अन्य सदस्य किसी न किसी तरीके से उत्पीड़न करते हैं। उत्पीड़न के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार उनके पुत्र हैं।
शहर में लगभग 61 फीसदी पुत्र अपने बुजुर्ग माता पिता के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं। यह आंकड़े बुजुर्गों के लिए काम करने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था हेल्पेज इंडिया की सर्वे रिपोर्ट में है। हाल ही में जारी इस रिपोर्ट में बुजुर्गों की स्थिति पर बारीकी से दर्शाया गया है।
हेल्पेज इंडिया ने इस साल देश के अलग-अलग राज्यों के 23 शहरों में सर्वे किया था। इस सर्वे में प्रत्येक शहर के 218 बुजुर्ग (60 साल से ज्यादा) पुरुष व महिलाओं से बातचीत के आधार पर सर्वे किया गया। कुल 5014 बुजुर्गों को इस सर्वे में शामिल किया गया था।
इस रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 56 फीसदी बुजुर्ग किसी न किसी तरह से संतानों या घर के सदस्यों द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं। बुजुर्गों का उत्पीड़न करने में उनके पुत्र ही सबसे ज्यादा है। देशभर में इस सर्वे के आधार पर माना गया है कि 52 फीसदी पुत्र अपने बुजुर्ग माता-पिता का किसी न किसी तरह से उत्पीड़न करते हैं। जबकि, 34 फीसदी बुजुर्ग उनकी पुत्र वधुओं द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं। उत्पीड़न करने वालों में कम ही सही मगर बेटियों की भी हिस्सेदारी है। संपूर्ण सर्वे में देश में छह फीसदी बेटियां इसके लिए जिम्मेदार हैं। देहरादून में भी हालात इनसे इतर नहीं हैं।
ये है देहरादून के बुजुर्गों की स्थिति
किस तरह से होता है उत्पीड़न
अनादर-80 फीसदी
मारपीट-15 फीसदी
मौखिक उत्पीड़न-57 फीसदी
आर्थिक उत्पीड़न-59 फीसदी
उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार
पुत्र-61 फीसदी
पुत्रवधु-28 फीसदी
पत्नी या पति-13 फीसदी
बेटियां-4 फीसदी
पोते-पोतियों का मिलता है ज्यादा दुलार
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून के बुजुर्गों ने माना है कि उनके पोते पोतियां उन्हें सबसे ज्यादा दुलार करते हैं। यानी उत्पीड़न करने में उनकी किसी भी प्रकार से भूमिका नहीं है। जबकि, रजवाड़ों के शहर जयपुर के 18 फीसदी बुजुर्गों ने माना है कि उनके पोते पोतियां भी उत्पीड़न करते हैं। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर कानपुर का नाम है जहां के 11 फीसदी बुजुर्ग ये मानते है कि उनके पोते पोतियां भी उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं।