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...और महंगे शौक ने सुधा को बना डाला अपराधी
मनमीत रावत
Updated Wed, 14 Aug 2013 11:13 AM IST
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महंगे लाइफ स्टाइल और ब्रांडेड कपड़ों की शॉपिंग, इन दो आदतों ने सुधा को शातिर अपराधी बना डाला। सुधा को शॉपिंग का बेहद शौक था। उसे झाझरा में हुई जमीन डील में जो आठ लाख रुपये हरिओम की तरफ से एडवांस मिले थे। उसने इस रकम को शॉपिंग में उड़ा दिया। सुधा ने यह बात पुलिस बयान में भी दर्ज कराई।
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सुधा ने पुलिस को बताया कि दलाली के रुपयों से उसने कुछ माह पहले ही बसंत विहार के पॉश इलाके में एक कोठी बीस हजार रुपये प्रति माह पर किराये पर ली थी। लाखों रुपये डेकोरेशन और अन्य कीमती सामान पर खर्च किए। कई लाख के तो ब्रांडेड कपड़े ही खरीदे। वहीं एक लाख साठ हजार रुपये उसने दिल्ली अपने बेटी की छह माह की हास्टल फीस दी। इन्हीं सब कामों में आठ लाख रुपये खर्च हो गए। इसी तरह उसने युद्धवीर सिंह रावत द्वारा दिए गए 14 लाख रुपयों से भी जमकर ऐश किया।
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वह कभी नहीं सोचती थी उसे रुपये वापस भी करने पड़ सकते हैं। उसने बताया 14 लाख रुपये मिलते ही उसने चकराता रोड में स्थित एक दुकान से 24 हजार रुपये में किराये की कोठी के लिए पर्दे लिए। जो रकम उसे मिलती थी, उससे वह पहले की कुछ उधारी भी चुका देती थी। हरिओम ने रुपयों के लिए ज्यादा दबाव डाला तो उसने अपना सोने का मंगल सूत्र और अंगूठी उसे दे दी, जिसे बेच कर हरिओम को 64 हजार रुपये मिले थे।
22 लाख में हुई थी डील
सुधा ने पुलिस को बताया कि युद्धवीर ने उसे एमबीबीएस सीट में दाखिले के लिए 14 लाख रुपये दिए थे। हत्या की पूरी कहानी भी 14 लाख रुपये के इर्दगिर्द ही बुनी गई। वहीं पांवटा साहिब के बलराज ने पुलिस को बताया कि उससे 22 लाख रुपये एडमिशन के एवज में लिए गए हैं। अब पुलिस, यह पता लगा रही है कि आठ लाख रुपये कहां गए। क्या युद्धवीर ने यह रकम अपने पास रख ली थी। सीओ मसूरी जया बलोनी ने बताया पुलिस जांच कर रही है कि यह रुपये कहां गए।
बेटी की एमबीबीएस सीट के लिए लिए थे 15 लाख रुपये उधार
राजपुर थाने में मंगलवार को एक शख्स फूटफूट रो रहा था और सुधा की बेमानी के किस्से सुना रहा था। उसकी बातों से जाहिर था कि सुधा बेहद शातिर किस्म की महिला है। यह वह शख्स था जिसके पूरे परिवार को सुधा ने सड़क पर ला दिया। हापुड़ के पिलखुवां गांव से आए डा. भेजवीर ने बताया वह गांव में प्राइवेट क्लीनिक चलाते हैं।
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बेटी ने 2011 में 12 वीं की पढ़ाई पूरी की तो उन्होंने सोचा कि वह उसे डाक्टर बनाएंगे। उनकी ही रिश्तेदार ऊषा और गांव के कुछ लोगों ने बताया कि देहरादून में सुधा पटवाल नाम की एक दलाल एमबीबीएस में एडमीशन कराती है। उनकी बातों पर आकर डा. भोजवीर ने दून में सुधा से मुलाकात की। सुधा ने उनसे 15 लाख रुपये की डिमांड की। वह सुधा की बातों में आ चुके थे और कई गांव के कई लोगों से 15 लाख रुपये उधार लेकर उसे दे दिए। लेकिन रुपये लेने के बाद सुधा मुकर गई।
हापुड़ में भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
आखिरकार उन्होंने थाना पिलखुवां, जिला हापुड़ में सुधा समेत पांच अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। कुछ ही दिन पहले पिलखुवां थाने की पुलिस को सुधा की गिरफ्तारी के लिए बी-वारंट मिल गया था। वारंट की तामिल के लिए रविवार को वह पुलिस के साथ सुधा के बुलंदशहर स्थित घर आए। वहां उसकी मां ने बताया कि सुधा को पुलिस ने किसी हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह सुनते ही उनकी रुपये मिलने की उम्मीद मिट्टी में मिल गई।
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