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कुंभ कोविड टेस्ट फर्जीवाड़ा: मैक्स कॉरपोरेट ने याचिका वापस ली, दुबारा दर्ज करने की अनुमति मिली
Tue, 06 Jul 2021 10:22 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 06 Jul 2021 10:22 PM IST
सार
इस दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि याचिका में कुछ तथ्य नए सामने आए हैं, इसलिए उन्हें याचिका वापस लेने की स्वीकृति देते हुए दोबारा से दायर करने की अनुमति दी जाए।
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कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट में मंगलवार को कुंभ मेले में कोरोना टेस्टिंग फर्जीवाड़े में आरोपित मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज के सर्विस पार्टनर शरत पंत व मलिका पंत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि याचिका में कुछ तथ्य नए सामने आए हैं, इसलिए उन्हें याचिका वापस लेने की स्वीकृति देते हुए दोबारा से दायर करने की अनुमति दी जाए। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दोबारा से याचिका पेश करने की अनुमति दे दी है।
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न्यायमूर्ति एनएस धानिक की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। शरत पंत व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे मैक्स कॉर्पोरेट सर्विसेस में सर्विस प्रोवाइडर हैं। कहा कि कोरोना टेस्टिंग परीक्षण और डेटा प्रविष्टि के दौरान मैक्स कॉरर्पोरेट का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। परीक्षण और डेटा प्रविष्टि का सारा काम सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में किया गया था।
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इन अधिकारियों ने परीक्षण स्टालों में जो कुछ भी किया गया, उसे अपनी मंजूरी दे दी। अगर कोई गलत काम कर रहा था तो कुंभ मेले की पूरी अवधि के दौरान अधिकारी चुप क्यों रही। मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि कुंभ मेले के दौरान उन्होंने (मैक्स कॉरपोरेट) अपने को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी तरीके से टेस्ट किए।
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फर्म, लैब संचालकों के स्टांप वेंडरों से भी पूछताछ
मैक्स कॉरपोरेट सर्विस और लैब संचालकों के लिए हुए करार के कागजात तैयार करने वाले स्टांप वेंडरों से एसआईटी की टीम ने मंगलवार को पूछताछ की। इसके साथ ही कुंभ मेले में सेक्टर प्रभारी बनाए गए तीन डॉक्टरों से भी पूछताछ हुई। एसआईटी की टीम दो दिन में 24 में से सात डॉक्टरों से पूछताछ कर चुकी है।
महाकुंभ मेले के दौरान हुए कोरोना जांच घोटाले में नामजद मैक्स कॉरपोरेट सर्विस के पार्टनर, नलवा लैब हिसार व डॉक्टर लाल चंदानी लैब सेंट्रल दिल्ली के संचालकों से एसआईटी की टीम पूछताछ कर चुकी है। शनिवार को एसआईटी की टीम ने कुंभ मेले के दौरान मेला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सेक्टर प्रभारी के रूप में तैनात किए गए 24 डॉक्टरों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुुलाया था। सोमवार को चार डॉक्टरों से पूछताछ की गई। वहीं मंगलवार को तीन डॉक्टर ही एसआईटी के सामने पेश हुए।
डॉक्टरों से मंगलवार को छह घंटे तक पूछताछ चली। अभी 17 डॉक्टरों को एसआईटी के सवालों का जवाब देना है। इसके साथ ही एसआईटी की टीम ने मंगलवार को मैक्स कॉरपोरेट सर्विस, नलवा लैब हिसार व डॉक्टर लाल चंदानी लैब दिल्ली के बीच अनुबंध पत्र तैयार करने वाले स्टांप वेंडरों से भी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान स्टांप किस तरीके से खरीदे गए और कितने रुपये के स्टांप खरीदे गए, जैसे प्रमुख सवाल पूछे गए। जांच अधिकारी राजेश शाह ने बताया कि मंगलवार को तीन डॉक्टरों के अलावा स्टांप वेंडरों से पूछताछ की गई है। अन्य संस्करणों के लिए
हाईकोर्ट का सरकार को जवाब देने का अंतिम अवसर दिया
हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2005 बैच के कांस्टेबलों को नई पेंशन स्कीम में शामिल करने के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को अंतिम अवसर देते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मामले में कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी समय दिया था लेकिन अभी तक जवाब पेश नहीं किया गया है। सरकार जान बूझकर इस मामले को लटका रही है।
न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पुलिस विभाग में कार्यरत गुरमीत कौर व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह पुलिस विभाग के कांस्टेबल के पद पर 22 अक्तूबर 2005 में भर्ती हुए थे। सरकार ने 25 अक्तूबर 2005 को नई पेंशन स्कीम जारी कर दी। इस स्कीम में कहा गया है कि यह स्कीम पुराने बैच के कर्मचारियों पर भी लागू होगी। इस स्कीम को उन्होंने अपनी याचिकाओं में चुनौती देते हुए कहा कि यह स्कीम उन पर लागू नहीं हो सकती क्योंकि उनकी नियुक्ति शासनादेश जारी होने से पहले हो चुकी है, इसलिए उनको पुरानी पेंशन स्कीम का ही लाभ मिलना चाहिए।