{"_id":"5766b0f14f1c1bbd4f11bcb2","slug":"corruption-in-power-corporation-uttarakhand","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा ने खोला मोर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा ने खोला मोर्चा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 19 Jun 2016 08:44 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : concept photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऊर्जा निगम में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने यूपीसीएल के एमडी एसएस यादव के खिलाफ घोटाले का नया आरोप लगाया है।
विज्ञापन
पार्टी के मुताबिक देहरादून के झाझरा में 220 केवी के सब स्टेशन के लिए जो जिस कंपनी से 160 एमवीए का ट्रांसफार्मर खरीदा गया वह कंपनी इतनी क्षमता का ट्रांसफार्मर सप्लाई करने के लिए पिटकुल से सूचीबद्ध नहीं थी। टेंडर खुलने के बाद कंपनी को लिस्ट में जोड़ा गया। जांच में जिस अधिकारी ने ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर सवाल उठाया उसी को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा भाजपा ने कैपिसिटर बैंक की खरीद में भी अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
विज्ञापन
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल ने रविवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि यूपीसीएल के एमडी एसएस यादव द्वारा कायदे-कानून को ताक कर रखकर कई फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब यादव ने पिटकुल का कार्य भार संभाला था, उस वक्त कैपिसिटर बैंक घोटाला किया गया। वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए जो कैपिसिटर खरीदे गए उसकी कीमत पूर्व में खरीदे गए कैपिसिटर से अधिक है।
विज्ञापन
कैपिसिटर का आज तक उपयोग नहीं किया गया है। गोयल ने झाझरा में स्थापित सब स्टेशन के लिए खरीदे गए ट्रांसफार्मर को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मैसर्स आईएमपी से 160 एमवीए का ट्रांसफार्मर खरीदा गया। कंपनी उस वक्त इतनी क्षमता का ट्रांसफार्मर सप्लाई करने के लिए सूचीबद्ध नहीं थी।
गोयल ने कहा कि यूपीसीएल के एमडी की एक सीडी उन्होंने जारी की थी, जिसमें वो रुपयों से भरा पैकेट लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। शासन स्तर से पहले कहा गया कि इस मामले की जांच मुख्य सचिव करेंगे। बाद कहा गया ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव करेंगे। फिर दूसरे विभाग के अपर सचिव नीरज खैरवाल को इसकी जांच सौंपी गई।
कुछ दिन पहले ही शासन की ओर जांच करने वाले अधिकारी की पत्नी की तैनाती ऊर्जा विभाग में अपर सचिव के रूप में कर दी गई है। इससे जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यूपीसीएल का एमडी को जो सेवा विस्तार दिया गया था, उसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है। शासन की ओर से नये एमडी की तैनाती के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। उसको देखते हुए लगता है कि उनको एक और सेवा विस्तार दिए जाने की तैयारी की जा रही है।
ट्रांसफार्मर की खरीदारी एसएस यादव से पहले गई थी। इसके लिए तत्कालीन उप महाप्रबंधक ( क्रय एवं अनुबंध) जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ जांच हो चुकी है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जहां तक कैपिसिटर बैंक की बात है तो एसएस यादव के कार्यकाल में जो खरीदारी हुई है उसकी क्वालिटी पूर्व में हुई खरीदारी से बेहतर है। इस कारण कीमत ज्यादा है। जहां से यूपीसीएल के एमडी को सेवा विस्तार दिए जाने की बात है। यह प्रदेश सरकार का विशेषाधिकार है।
- पीसी ध्यानी, निदेशक (एचआर) व प्रवक्ता, यूपीसीएल
Punlished By : Nirmala Suyal