उत्तराखंड: कोरोना से हुआ बहुत नुकसान, एक साल में पटरी पर लौटेगी अर्थव्यवस्था, पढ़ें सीएम त्रिवेंद्र का पूरा इंटरव्यू...
- कर्मचारियों के लिए इस वर्ष तबादला सत्र शून्य
- अमर उजाला से खास बातचीत में बोले सीएम
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का मानना है कि सरकार कोविड-19 को नियंत्रित रखने में काफी हद तक कामयाब रही है। वह जनता को यह भी विश्वास दिलाना चाहते हैं कि संक्रमण से लड़ने के लिए प्रदेश में पुख्ता मेडिकल इंतजाम हैं। हजारों की संख्या में लौट रहे प्रवासियों को घर के पास रोजगार मुहैया करवाने के लिए उनकी सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। कोरोना से अर्थव्यवस्था को पहुंची गहरी चोट से वह काफी चिंतित हैं, लेकिन उनको विश्वास है कि एक साल के भीतर व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
वह मानते हैं कि पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है। ऐसे में चारधाम यात्रा शुरू करने को लेकर उनकी पूरी तैयारी है, बस केंद्र की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। उन्होंने कर्मचारियों को वार्षिक तबादलों से राहत देते हुए तबादला सत्र शून्य कर दिया है। मुख्यमंत्री ने ‘अमर उजाला उत्तराखंड’ के स्टेट ब्यूरो चीफ अरुणेश पठानिया के साथ बातचीत में कोरोना महामारी को लेकर सरकार की तैयारियों से लेकर प्रदेश आर्थिकी को पटरी पर लाने की अपनी योजनाएं साझा की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश.....
कोविड-19 से प्रदेश की आर्थिकी को कितना नुकसान पहुंचा? इससे निपटने की क्या योजना है?
मुख्यमंत्री: कोरोना संक्रमण के बाद लॉकडाउन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ है। एक अनुमान है कि नुकसान का आंकड़ा कई हजार करोड़ में है। पर्यटन गतिविधियों के बंद रहने से हमारी अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। सरकार इस कोशिश में है कि एक साल में अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाए। प्रदेश सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शुरुआत कर दी है। लगभग 5 हजार उद्योगों को संचालन के लिए अनुमति दी गई है। इनमें 1 लाख 75 हजार से अधिक श्रमिकों का नियोजन होगा। अर्थव्यवस्था के रिवाइवल के लिए हमने पूर्व मुख्य सचिव व वित्त विशेषज्ञ इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है। राज्य की अर्थव्यवस्था, राजस्व संसाधनों, आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियों को किस प्रकार से दोबारा पटरी पर लाया जाए, इस पर समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट भी दी है। रिपोर्ट में की गई संस्तुतियों के अनुरूप योजना बनाई जा रही है। कृषि, बागवानी, डेरी, मत्स्य आदि संबंधित क्षेत्रों में सुधार के लिए कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित की गई है। इस समिति की रिपोर्ट पर कैबिनेट में चर्चा कर सभी की सहमति से आर्थिक गतिविधियों में तेजी के लिए कदम उठाए जाएंगे।
प्रश्न: क्या सरकार इस वर्ष कर्मचारियों के तबादले को लेकर शून्य सत्र कर सकती है?
मुख्यमंत्री: कोविड19 को देखते हुए सरकार यह निर्णय ले चुकी है कि इस बार तबादलों पर रोक रहेगी। इस सत्र में कोई तबादला नहीं होगा। इसकी मंजूरी दी जा चुकी है। बेहद अनिवार्य और अन्य किसी कारण से जरूरी तबादले ही हो सकेंगे। लेकिन सामान्य तबादलों पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सरकार की तैयारी कितनी पुख्ता है?
मुख्यमंत्री : उत्तराखंड में कोविड-19 को काफी हद तक नियंत्रित करने में कामयाब रहे हैं। हम कह सकते हैं कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए हमारी तैयारी शुरू से पुख्ता रही है। 26 जनवरी को जब नेपाल में एक केस आया था, तभी से हम सतर्क हो गए थे। विभिन्न राज्यों से आ रहे प्रवासियों के कारण यहां भी संक्रमण फैलने की आशंका थी। यही हमारी चिंता थी और इसके दृष्टिगत ही सरकार ने पहले से ही संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तैयारी शुरू कर दी थीं। लॉकडाउन की अवधि में हमने कोविड-19 के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुविधाओं का काफी विस्तार किया है।
राज्य में कोविड-19 के दृष्टिगत पहले एक भी टेस्टिंग लैब नहीं थी, अब 4 टेस्टिंग लैब शुरू हो चुकी हैं। प्रदेश के सभी जिलों और दून मेडिकल कॉलेज में 73 आईसीयू, 46 वेंटिलेटर, 21 बाइपेप मशीनों की व्यवस्था की गई है। इस समय राज्य में 111 स्थानों पर कोविड-19 से निपटने की सुविधा है। इनमें अस्पताल, हेल्थ सेंटर और कोविड सेंटर हैं। वर्तमान में राज्य में 236 आईसीयू बेड, 10233 आइसोलेशन बेड हैं। 120 वेंटिलेटर की व्यवस्था है।
यही नहीं यदि कोविड-19 के मामले बढ़ते हैं तो सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेज और मिलिट्री अस्पताल में अतिरिक्त तौर पर आईसीयू, आइसोलेशन और वेंटिलेटर की व्यवस्था भी की है। प्रदेश में ई संजीवनी टेली मेडीसिन सेवा प्रारंभ की गई है। हाल ही में 401 चिकित्सकों को नियुक्ति दी गई है। 467 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव आयोग को भेजा जा रहा है।
प्रश्न - प्रवासियों के लौटने पर लगातार संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या रणनीति बनाई है?
मुख्यमंत्री : प्रवासियों को हम एक नियंत्रित संख्या में वापस ला रहे हैं। जिस स्टेशन से प्रवासियों को ट्रेन या बसों के जरिये लाया जा रहा है, वहां भी उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। उत्तराखंड आने पर फिर से उनकी स्क्रीनिंग की जा रही है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि थर्मल स्क्रीनिंग के बाद भी संदिग्ध कोरोना मरीज को संस्थागत क्वारंटीन किया जाए, अन्य लोगों को उनके गांव के पास बने क्वारंटीन सेंटर में आवश्यक रूप से रखा जाए। इसके लिए गांवों में स्कूल, पंचायत घर और अन्य स्थानों पर क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था की गई है। प्रधानों को भी जिम्मेदारी और अधिकार दिए गए हैं। कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति ग्राम प्रधान का सहयोग नहीं करता तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन के तहत कार्रवाई की जाए। अब तक प्रदेश में देश के विभिन्न राज्यों से सरकार बसों और ट्रेन के जरिये करीब 90 हजार से अधिक प्रवासियों को उत्तराखंड लेकर आ चुकी है। यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। इसके अतिरिक्त निजी वाहनों से वापस लौटने के पास भी दिए जा रहे हैं।
प्रवासी गांव लौट रहे हैं, इनके रोजगार की क्या योजना है?
मुख्यमंत्री: प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए जो 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किया है, उसमें भी इसकी चिंता की गई है। राज्य सरकार भी प्रवासियों के रोजगार को लेकर चिंतित है। इसके लिए एक होप एप भी बनाया गया है। प्रवासियों से इस एप में उनकी स्किल्स और कार्य के अनुभव के बारे में जानकारी मांगी गई है। हमने हमेशा रिवर्स पलायन की बात की है। और इसके लिए लगातार कोशिशें की हैं। कोविड-19 के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी लौट कर आ रहे हैं। हम सकारात्मक सोच रखते हुए इसे भी हमारे पर्वतीय क्षेत्र को आबाद करने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है। इसमें प्रवासी सेवा और निर्माण क्षेत्र में ऋण ले सकेंगे। श्रेणी के अनुसार राज्य सरकार अनुदान उपलब्ध कराएगी। इसी प्रकार कई अन्य योजनाओं पर भी काम कर रहे हैं। इससे घर लौटे प्रवासियों को यहीं रोजगार मिलेगा और वे राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान करेंगे।
प्रश्न: चारधाम यात्रा पहाड़ की आर्थिकी की रीढ़ है, इसे शुरू करने को लेकर क्या तैयारी है?
मुख्यमंत्री: वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रभाव चारधाम यात्रा पर भी पड़ा है। चारों धामों के कपाट तो खोल दिए गए हैं, लेकिन अभी श्रद्धालुओं को चार धाम में दर्शनों की अनुमति नहीं है। हमारी कोशिश है कि ग्रीन जोन के जिलों के लोगों को मंदिर में नियंत्रित संख्या में दर्शन की अनुमति मिले। लेकिन अभी 31 मई तक केंद्र ने धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक सीमित संख्या में यात्रा शुरू करेंगे।
प्रश्न: क्या लौट रहे प्रवासियों के उजाड़ खेतों को ठीक करने का कार्य मनरेगा से जोड़ा जा सकता है?
मुख्यमंत्री: हम मनरेगा के हजारों काम शुरू कर चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या में लोगों को काम मिला है। आप जानते ही हैं कि प्रधानमंत्री ने जो 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किया है, उसमें से मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन है। हम देखेंगे कि मनरेगा में पहले से स्वीकृत कार्यों के साथ और किन कामों को लिया जा सकता है। प्रदेश वासियों के हित में जो भी होगा, किया जाएगा। मनरेगा में हमने दिहाड़ी बढ़ाने का भी अनुरोध किया है। कृषि के अल्पकालिक कार्य भी मनरेगा के तहत किए जाने का अनुरोध किया है।
छह माह बाद हरिद्वार में महाकुंभ होना है। ऐसी परिस्थिति में आयोजन को लेकर सरकार कितनी तैयार है?
मुख्यमंत्री: अगले वर्ष हरिद्वार में महाकुंभ है। अभी हमारे पास समय है। परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लिए जाएंगे। स्थायी कार्य लगातार चल रहे हैं, लेकिन श्रमिकों की कमी के कारण उनकी रफ्तार कम है। दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। अस्थायी कार्यों को लेकर भी निरंतर काम हो रहा है। प्रदेश सरकार कुंभ के आयोजन के लिए पूरी तरह से तैयार है।
प्रश्न: कोरोना महामारी को लेकर प्रदेश की जनता के लिए आपका क्या संदेश है?
मुख्यमंत्री: प्रदेशवासियों से मेरी अपील है कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में सहयोग दें। मास्क अनिवार्य रूप से पहनें और अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें, जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर से संपर्क करें। आपको घबराने की जरूरत नहीं है। प्रदेश में अभी तक कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई है। सभी संक्रमित लोग इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटे हैं। बस सभी लोग धैर्य बनाए रखें।