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Coronavirus in Uttarakhand : हाथों की हुनरमंदी पर भारी पड़ी मंदी, हथकरघा, कुटीर उद्योग चौपट
Mon, 27 Jul 2020 03:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 27 Jul 2020 03:59 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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कोविड महामारी के कारण उत्तराखंड के प्राचीन हस्तशिल्प, हथकरघा और कुटीर उद्योग भी पटरी पर आने के लिए सांसें भर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण हुनरमंद हाथों पर भी आर्थिक मंदी की मार पड़ी है। प्रदेश में हजारों लोगों की आजीविका हथकरघा और कुटीर उद्योगों से जुड़ी है। परंपरागत उद्योगों को कारोबार का पहिया घुमाने के लिए सरकार से आर्थिक सहायता और उत्पाद की बिक्री में मदद की जरूरत है।
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प्रदेश में लगभग 60 हजार हस्तशिल्प कारीगर हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट का कारोबार करते हैं। वहीं, कृषि और गैर कृषि पर सैकड़ों कुटीर उद्योग स्थापित है। ये उद्योग सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों के रोजगार से जुड़े हैं। इस बार लॉकडाउन के कारण चारधाम यात्रा भी समय पर शुरू नहीं हो पाई है, जिससे हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट के कारोबार को बड़ा झटका लगा है। स्थानीय कारीगर अपने उत्पादों को यात्रा सीजन के दौरान चारधाम मार्गों पर बेचते थे। वहीं, लॉकडाउन के कारण मेले और अन्य सरकारी आयोजन न होने के कारण बाजार में उत्पादों की मांग घट गई है।
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प्रदेश में रिंगाल से बने उत्पाद, तांबे, काष्ठ कला, शॉल, दुपट्टा, कारपेट, दन, भीमल के नेचुरल फाइबर से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं। उत्तराखंड में हस्तशिल्प और हथकरघा का सालाना लगभग 50 करोड़ का कारोबार होता है। प्रति माह लगभग 4 से 5 करोड़ कारोबार किया जाता है, लेकिन लॉकडाउन से हथकरघा और कुटीर उद्योगों का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है।
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कोरोना महामारी से हरकरघा और कुटीर उद्योगों पर भी बड़ी मार पड़ी है। फाइबर, तांबा समेत अन्य कच्चा माल न मिलने, बाजार में मांग कम होने से हस्तशिल्पियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। चारधाम यात्रा में कुटीर उद्योगों का माल बिकता था। वहीं मेेले और त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों का अपना एक बाजार था। लॉकडाउन में ये सब न होने से हथकरघा और कुटीर उद्योग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार को हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम व अन्य कुटीर उद्योगों के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना होगा।
- मनोज रावत, विशेषज्ञ, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट मार्केटिंग