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बुखार ही नहीं ये तीन लक्षण भी दिखें तो हो सकता है कोरोना, डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय

Wed, 10 Jun 2020 09:23 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 10 Jun 2020 09:23 PM IST
सार

  • सूंघने की शक्ति, मुंह का स्वाद बिगाड़ रहा कोरोना
  • ज्यादातर मरीजों में नजर नहीं आ रहे लक्षण, पाचन तंत्र भी होता है प्रभावित

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Coronavirus in uttarakhand: Doctors Told These Three New Symptoms and Prevention Measures
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

कोरोना वायरस का संक्रमण मरीज की सूंघने की शक्ति और मुंह का स्वाद भी बिगाड़ रहा है। साथ ही पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर रहा है। हालांकि इस तरह के मरीज 15 प्रतिशत तक सामने आ रहे हैं। कोरोना वायरस सबसे ज्यादा सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।

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जैसे-जैसे कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे इसके दूसरे असर भी नजर आने लगे हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सांस रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि ज्यादातर मरीजों में सामान्य तौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते।
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यह भी पढ़ें: Coronavirus: लंबे समय तक मास्क लगाने से हो सकता है इस बीमारी का खतरा, ये लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
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उन्होंने बताया कि कोरोना पीड़ित मरीजों में सूंघने की शक्ति और मुंह का स्वाद कम होने, भूख कम लगने की भी शिकायतें आ रही हैं। हालांकि, यह दिक्कत 15 दिन तक में ठीक हो जाती हैं। कोरोना से डायरिया होने का भी डर रहता है।

सुपाच्य भोजन लें और खूब पानी पिएं

डॉ. अनुराग ने बताया कि सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार, डायरिया या पेट दर्द जैसी कोई भी दिक्कत हो तो डॉक्टर की सलाह से बिना कोई दवा न लें। इसके अलावा सुपाच्य और पौष्टिक भोजन, दाल, ताजी सब्जियां अच्छी तरह से धुलने के बाद खूब पका कर लें। किसी के शरीर में वायरल बुखार में पानी कम हो जाता है। ऐसे में आम आदमी को भी कम से कम 10 गिलास पानी रोजाना पीना चाहिए। साथ ही विटामिन सी युक्त ताजे फल खाते रहें। ताकि शरीर की इम्यूनिटी मजबूत रहे।

गंभीर मामलों में फेल होने लगते हैं शरीर के विभिन्न अंग
डॉ. अनुराग ने बताया कि गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले, पहले से किसी बीमारी से पीड़ित और अधिक उम्र के मरीज की हालत बिगड़ने पर निमोनिया होने, फेफड़े खराब होने के साथ ही फेफड़े, दिल या ब्रेन में थक्के जमने का डर रहता है। हालांकि यहां इस तरह के बहुत कम मामले सामने आए हैं।

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