उत्तराखंड में कोरोना: शुक्रवार को मिले 20 नए मामले, रानीखेत में दुबई से आए चार नागरिकों को ढूंढ रहा प्रशासन
शुक्रवार को देहरादून में आठ, अल्मोड़ा, बागेश्वर व हरिद्वार में एक-एक, नैनीताल में चार, पिथाैरागढ़ में दो और ऊधमसिंह नगर जिले में तीन मामले सामने आए हैं।
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प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 20 नए मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। वहीं, शुक्रवार को 13 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को देहरादून में आठ, अल्मोड़ा, बागेश्वर व हरिद्वार में एक-एक, नैनीताल में चार, पिथाैरागढ़ में दो और ऊधमसिंह नगर जिले में तीन मामले सामने आए हैं। वहीं, अब प्रदेश में कोविड के 155 एक्टिव केस हैं, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या 63 देहरादून की है।
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ओमिक्रोन : रानीखेत में दुबई से आए चार नागरिकों को ढूंढ रहा प्रशासन
दुबई से भारत आए चार स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के पसीने छुटा दिए हैं। कोरोना के ओमिक्रोन स्वरूप के बढ़ते खतरे के बीच केंद्र के दिशानिर्देशों के तहत इन्हें स्थानीय स्तर पर भी कोरोना जांच करानी थी लेकिन इन्होंने जांच नहीं कराई। फिलहाल अब तक इनका सुराग नहीं लगा है।
दस दिसंबर को रानीखेत में दुबई से चार और इंग्लैंड से चार लोग लौटे थे। इंग्लैंड से पहुंचे चारों लोगों की दोबारा जांच की गई। ये सभी निगेटिव पाए गए हैं। वहीं, दुबई से लौटे लोगों की तलाश में स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस की मदद मांगी है। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग राजपुरा निवासी हैं। इन्हें दोबारा जांच के लिए राजकीय अस्पताल में संपर्क करना चाहिए था, लेकिन इन्होंने संपर्क नहीं किया।
शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक स्वास्थ्य विभाग इनका सुराग नहीं लगा पाया है। राजकीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केके पांडेय ने बताया कि इंग्लैंड से आए चार नागरिकों की जांच कराई गई। ये चारों निगेटिव पाए गए हैं। दुबई से पहुंचे चार अन्य लोगों का भी सुराग लग जाएगा। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड से आए चारों नागरिकों का पूरी तरह टीकाकरण हो चुका है। इन्हें 14 दिन के लिए आइसोलेट किया जाएगा।
नियमों के पालन से कम होता है कोरोना का जोखिम
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से हाल ही में किए गए संयुक्त शोध से पता चला है कि शारीरिक दूरी बनाए रखने, मास्क पहनने और लगातार हाथों की स्वच्छता बनाए रखने से कोविड संक्रमण के प्रसार के जोखिम को रोका जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के बीच कोविड-19 के लिए जिम्मेदार जोखिम कारकों का आकलन करने के लिए एक बहु-केंद्रित एकता परीक्षण योजना पर कार्य किया जा रहा है। इस योजना के उद्देश्यों के अनुरूप एम्स ऋषिकेश के सीएफएम विभाग की ओर से भी विस्तृत अध्ययन किया गया। एम्स के सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना और एसोसिएट प्रोफेसर मीनाक्षी खापरे के नेतृत्व में इस अध्ययन की शुरुआत एक वर्ष पूर्व दिसंबर-2020 में की गई थी।
अध्ययन पूर्ण होने पर इस विषय पर एम्स ऋषिकेश के सीएफएम विभाग द्वारा प्रसार कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय ‘स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं के मध्य कोविड-19 के लिए जोखिम कारकों का आकलन और भारत के तृतीयक देखभाल अस्पतालों में अध्ययन’ था। कार्यशाला में मुख्य अतिथि संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने जांचकर्ताओं की टीम को अध्ययन पूरा करने के लिए बधाई दी। कहा कि किसी भी संक्रामक बीमारी से बचाव के मामले में हमारे लिए हाथ धोने, शारीरिक दूरी और व्यक्तिगत सुरक्षा मामलों की मूल बातों का पालन करना नितांत आवश्यक है।
भारत में डब्लूएचओ के प्रोफेशनल अधिकारी डॉ. मोहम्मद अहमद ने उल्लेख किया कि डब्ल्यूएचओ ने अध्ययन केंद्रों की निरंतर निगरानी कर उन्हें अपने स्तर पर तकनीकी और अन्य तरह का पूर्ण सहयोग देते हुए इस बहु-केंद्रित अध्ययन की गुणवत्ता बनाए रखी है। डॉक्टर मोहम्मद ने कहा कि हाथ धोना और पीपीई किट पहनना और कोरोना जैसी संक्रामक बीमारियों से रोकथाम के लिए अभी भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपाय हैं।