कोरोना वायरस: एरीज के शोध कार्यक्रमों पर लगा 'ग्रहण', कैलाश यात्रा को लेकर बढ़ी व्यापारियों की टेंशन
- वैज्ञानिकों के विदेश दौरे हो रहे हैं निरस्त
- दूसरे देशों के नागरिकों के वीजा भी रद्द
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चीन में कोरोना वायरस के प्रभाव और इसके अन्य देशों में पड़ सकने वाले असर से यहां के प्रमुख संस्थान आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के शोध कार्यक्रम भी प्रभावित होने लगे हैं। एरीज के निदेशक डॉ. दीपंकर बनर्जी ने माना है कि कोरोना का असर एरीज के अध्ययन कार्यक्रमों पर पड़ रहा है और वैज्ञानिक विदेशी कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने को लेकर हिचक है। संस्थान के दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने शोध संबंधी अपनी विदेश यात्राएं कोरोना के कारण टाल दी हैं। इनमें एक वैज्ञानिक ने पिछले सप्ताह चीन और दूसरे को ताइवान जाना था।
एरीज के वैज्ञानिक उच्चतर शोध के लिए विदेश जाते रहते हैं। इन दौरों के बहुत सकारात्मक परिणाम भी आए हैं और यहां के वैज्ञानिकों ने विदेश में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं के चलते अंतरिक्ष संबंधी अनेक महत्वपूर्ण खोज भी की हैं। इसी सिलसिले में एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. अनिल के पांडे ने दो फरवरी को ताइवान जाना था। उन्होंने बताया कि अपेक्षाकृत छोटा देश होने के बावजूद ताइवान ने अंतरिक्ष विज्ञान में बहुत उन्नति की है और वहां विश्वस्तरीय टेलिस्कोप, अनुसंधान की सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर है। ताइवान के साथ एक सहयोगात्मक कार्यक्रम के तहत उन्हें दो महीने के लिए विशिष्ट अध्ययन के लिए वहां जाना था लेकिन उन्होंने कोरोना के कारण अपना कार्यक्रम पोस्टपोन कर दिया है। अभी निश्चित नहीं है कि अब वे वहां कब जाएंगे।
उधर, एरीज के वैज्ञानिक आलोक गुप्ता को भी पिछले सप्ताह चीन जाना था जहां शंघाई में एक फेलोशिप कार्यक्रम के तहत उन्हें शंघाई एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी में शोध और अध्ययन कार्यक्रम में प्रतिभाग करना था। आलोक गुप्ता ने बताया कि यद्यपि शंघाई वुहान से 15 सौ किलोमीटर दूर है और फिलहाल वहां कोरोना का प्रकोप नहीं है लेकिन खुद उनकी सहयोगी संस्था ने ही उन्हें एहतियातन अपना कार्यक्रम टाल देने का सुझाव दिया था।
कोरोना का कहर: कैलाश यात्रा को लेकर व्यापारी आशंकित
कोरोना वायरस के चलते चीनी नागरिकों और वाया चीन आने वाले दूसरे देशों के नागरिकों के वीजा रद करने के फैसले ने स्थानीय व्यापारियों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। व्यापारियों को आशंका है कि चीन में इस महामारी पर जल्द लगाम नहीं लगी तो भारत सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा को इस बार रद करने का फैसला ले सकती हैं। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी ही होगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को रद किए जाने की आशंका के पीछे व्यापारी जो वजह बता रहे हैं वह कुछ हद तक दुरुस्त भी नजर आ रही है। दरअसल, यात्रा को लेकर अभी तक विदेश मंत्रालय ने कोई तिथि घोषित नहीं की है। साथ ही यात्रियों से ऑनलाइन आवेदन भी नहीं लिए जा रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष तक 16 जनवरी के बाद ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इस संबंध में कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक अशोक जोशी का कहना है कि अभी मानसरोवर यात्रा को लेकर बैठक की कोई तिथि नहीं आई है।
उधर, मानसरोवर यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी संशय में हैं। आईटीबीपी सूत्रों के अनुसार पिछली बार तक 28 जनवरी से पांच फरवरी तक यात्रा के सफल संचालन को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो जाता था। विदेश मंत्रालय में बैठक के बाद पहले आधार शिविर धारचूला में बैठक होती थी। अभी तक कैलाश यात्रा के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों के अनुसार गुंजी से लिपुपास करीब 36 किमी तक मार्ग बर्फ से लकदक हैं। आईटीबीपी पिछले वर्षों तक इस सीजन में बर्फ हटा कर यात्रा मार्ग दुरुस्त करने में जुट जाती थी लेकिन अभी कोई तैयारी नहीं है।
गुजरात के पंच कैलाश परिवार के सदस्य कमलेश पटेल ने बताया कि पिछली बार तक यात्रा के लिए 16 जनवरी से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार यह अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। यात्रा के संबंध में जानकारी लेने के लिए वह खुद तीन दिन दिल्ली में डेरा डाले रहे। पिछले वर्ष 18 दलों के 923 यात्रियों ने कैलाश यात्रा की। इनमें से सर्वाधिक 137 यात्री गुजरात के थे।