उत्तराखंड में कोरोना टीकाकरण: दूसरी डोज के लिए भी बुक करना पड़ रहा स्लॉट, लोग परेशान
अभी तक कोरोना टीके की दूसरी खुराक के लिए स्लॉट बुक करने या ऑनलाइन पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं थी।
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अब कोरोना टीके की दूसरी खुराक लगाने के लिए भी ऑनलाइन स्लॉट बुक कराना पड़ रहा है। इससे लोगों को तमाम दिक्कतें हो रही हैं। अभी तक कोरोना टीके की दूसरी खुराक के लिए 18 साल से 44 साल तक की आयु वर्ग के लोगों को भी स्लॉट बुक करने या ऑनलाइन पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होती थी। उन्हें पहले लगे टीके की जानकारी आईडी और मोबाइल नंबर बताना होता था। जिसे टीकाकरण केंद्र पर ही टीकाकरण अधिकारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापित किया जाता था।
इसके बाद टीके की दूसरी खुराक लग जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल दी गई है। सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर टीके लगने की संख्या सीमित होने के चलते स्लॉट नहीं मिल पा रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप कुमार डिमरी ने बताया कि पूर्व में दूसरी खुराक के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक नहीं करना होता था, लेकिन अब सरकारी केंद्रों पर भीड़ बढ़ने की आशंका के मद्देनजर कोवैक्सीन टीके की दूसरी खुराक लगाने के लिए भी 18 से 44 साल तक की आयु वर्ग के लोगों को पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि 45 साल से अधिक की आयु वाले लोगों को 84 दिन बाद टीके की दूसरी खुराक दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि कोवीशील्ड टीके की दूसरी खुराक के लिए टीकाकरण केंद्र में जाने से पहले अभी ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी नहीं है। यह व्यवस्था फिलहाल लागू की गई है। आने वाले समय में जिस तरह से परिस्थितियां बनेंगी नियमों में बदलाव किया जा सकता है।
घर पहुंच कर दिव्यांगों को लगाए टीके
दिव्यांगजनों की सहूलियत को देखते हुए समाज कल्याण विभाग के जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र और स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से टीकाकरण के लिए विशेष कैंप लगाया गया। जबकि चलने फिरने में असमर्थ कुछ दिव्यांगजनों को उनके घर पर और कुछ को कार में ही टीका लगाया।
विकासनगर के बाबूगढ़ स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में सोमवार को आयोजित विशेष टीकाकरण कैंप में 32 दिव्यांगजनों को कोरोना टीके की पहली डोज लगाई गई। समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडेय के अनुसार दिव्यांगजनों को टीका लगवाने में किसी प्रकार की कोई पेरशानी न हो, इसके लिए बीते कुछ दिनों से विशेष कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
कैंप में कोरोना टीका लगाने के लिए आने वाले दिव्यांगजनों को बीमारी से बचने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उन्हें मास्क, सैनिटाइजर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।