{"_id":"93c636e3c868037ebc1b3bf87ef609cd","slug":"construction-of-aiims","type":"story","status":"publish","title_hn":"गिने-चुने मजदूर कर रहे एम्स का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गिने-चुने मजदूर कर रहे एम्स का निर्माण
हेमवती नंदन/ अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Wed, 02 Jul 2014 04:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऋषिकेश एम्स परियोजना की डेड लाइन समाप्त हुए ढाई वर्ष बीत चुके हैं। इतना ही नहीं नौ माह के एक्सटेंशन पीरियड को बीते भी पौने दो साल हो चुके हैं।
विज्ञापन
निर्माण में निकले कई दोष
मगर न तो प्रोजेक्ट पूरा हो पाया और न ही जल्द इसके पूरा होने के आसार ही नजर आ रहे हैं। जो निर्माण हुआ भी है, उनमें मानक के लिहाज से एम्स प्रशासन कई गुणदोष बता रहा है।
विज्ञापन
साथ ही इसमें भी काफी कुछ कार्य अभी शेष है। ऐसे में योजना को पूरा होने में कई साल और लग सकते हैं। एक दशक से प्रस्तावित एम्स परियोजना से लोगों को जल्द लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन
कारण है केंद्र सरकार द्वारा इसके निर्माण कार्य के लिए चयनित एजेंसियों की लापरवाही और मैन पावर की कमी। 2004 में ऋषिकेश में एम्स की शिला रखी गई थी, मगर योजना के निर्माण कार्य में 2009 से तेजी आई।
एम्स प्रशासन की मानें तो परियोजना को दिसंबर 2011 में पूरा होना था। डेड लाइन समाप्त होने के बाद अवशेष कार्य के लिए नौ महीने की समयावधि बढ़ाई गई थी।
जो सितंबर-12 में समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके पौने दो साल बाद भी प्रोजेक्ट का कार्य पूर्ण होना तो दूर 60 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाया है।
अधूरी योजनाएं
नर्सिंग कालेज, आडिटोरियम, नर्सिंग हॉस्टल, ट्रामा सेंटर, आईसीयू।
यह प्रोजेक्ट्स शुरू ही नहीं हुए
आटोवाक, मोर्चरी (पीएम हाउस), बंकर (कैंसर रोग में सिकाई के लिए ट्रीटमेंट का स्थल)
बिल्डिंग बनीं, मगर कार्य अधूरा
मेडिकल कालेज, हास्पिटल ब्लाक और ओपीडी ब्लाक का निर्माण हो चुका है, मगर ये बिल्डिंग भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं, जिससे एम्स प्रशासन इनका पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पा रहा है।
गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं एम्स प्रशासन
योजना के तहत अब तक हुए कई कार्यों पर गुणवत्ता को लेकर एम्स प्रशासन सवाल उठा चुका है। मगर सुधार कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं।
एम्स प्रशासन के अनुसार केंद्र सरकार की अधिकृत निर्माण एजेंसी एचएलएल द्वारा तैयार किए गए रेजिडेंशियल कांप्लेक्स का कुछ हिस्सा रहने लायक ही नहीं है। इसमें जलभराव, ओवरफ्लो और अन्य तरह की दिक्कतें आ रही हैं।
हालांकि एम्स प्रशासन ने कंपनी द्वारा नए ठेकेदार को कार्य सौंपने के बाद हुए कार्यों पर काफी हद तक संतोष जताया है। दूसरी ओर ओएमएक्स कंपनी के पैकेज में नर्सिंग कालेज, आडिटोरियम, नर्सिंग हास्टल, ट्रामा सेंटर समेत कई प्रोजेक्ट हैं।
एम्स सूत्रों की मानें तो इनमें से अधिकांश में कार्य के नाम पर औपचारिकता हो रही है। तीसरी कंपनी जेएमसी को मेडिकल कालेज, ओपीडी और अस्पताल ब्लाक, रोड, ड्रेनेज सिस्टम, एसी सिस्टम, मोर्चरी, एनीमल हाउस, आटोवाक, बंकर आदि कार्य करने हैं।
इनमें से कई कार्य अधूरे पड़े हैं और कइयों का अभी पता ही नहीं। एम्स प्रशासन की शिकायत पर निर्माण कार्य की मानिटरिंग करने वाली हाई लेवल कमेटी ने एक कांट्रेक्ट एजेंसी के टर्मिनेशन के लिए सरकार को लिखा है।
पेमेंट हो रहा, काम का पता नहीं
परियोजना के निर्माण में लगी कंपनियों को ऊंची पहुंच और दूसरे कारणों से पेमेंट तो हो रहा है, मगर धनावंटन की एवज में कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और लक्ष्य की अनदेखी की जा रही है।
सूत्रों की मानें तो इसी वजह से कंपनियां निर्माण की ओर गौर नहीं कर रही हैं। एम्स में अब तक कोई कार्य पूरा नहीं हो पाया है, कुछ में कामचलाऊ व्यवस्था चल रही है जबकि कुछ दो साल से यथास्थिति में हैं।
जो कार्य हुआ भी है, उनमें से कई कार्यों की गुणवत्ता ठीक नहीं है, लिहाजा उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। लापरवाही और गड़बड़ियों के कारण एम्स को ठीक से शुरू नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लोगों को लाभ नहीं मिल रहा।
- डॉ. राजकुमार, निदेशक एम्स ऋषिकेश