चहेते को नौकरी देने वाले CMO पर गाज, वसूला जाएगा वेतन
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स्वास्थ्य विभाग में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस) के पद पर नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थी को खारिज कर अयोग्य चहेते को नौकरी देना बागेश्वर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) जेसी मंडल को भारी पड़ गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर न केवल सीएमओ के वार्षिक चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी, बल्कि बड़ी बात यह है कि चहेते को दिए गए वेतन-भत्तों की भरपाई भी सीएमओ को करनी पड़ेगी। साथ ही अगस्त 2014 में हुई नियुक्ति को कोर्ट ने समाप्त कर खारिज किए गए योग्य अभ्यर्थी को नौकरी देने का आदेश दिया है।
आदेश का होगा पालन
कोर्ट के फैसले पर महानिदेशालय को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नियुक्ति पाने वाले को अब तक हुए वेतन भुगतान की वसूली नियुक्ति देने वाले सीएमओ से की जाएगी।
-ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य
पढ़िए, कैसे रचा गया था पूरा खेल
जिला तपेदिक अधिकारी कार्यालय बागेश्वर से 2 जुलाई 2014 को एसटीएस के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई थी। पद के लिए 28 आवेदन आए, जिसमें अभिषेक पाठक को नियुक्ति दी गई। एक अन्य अभ्यर्थी भुवन चंद्र पांडे ने नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
नियुक्ति में हुई मनमानी
नियुक्त पाने वाले अभिषेक पाठक को मेडिकल सोशल वर्क के अनुभव के लिए पांच अंक दिए गए जबकि याचिकाकर्ता को 10 माह का अनुभव होने के बावजूद शून्य मिला। न्यायालय ने नियुक्ति पाने वाले के अनुभव प्रमाण पत्र को किसी फर्जी संस्थान का करार दिया। इससे साबित हुआ कि सीएमओ बागेश्वर ने नियुक्ति में पक्षपात किया है।
कला स्नातक को रखा, फार्मेसी वाले को नहीं
जिस अभ्यर्थी को नियुक्ति दी गई वह कला स्नातक है, जबकि याचिकाकर्ता मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से फार्मेसी का डिग्री धारक है और सोशल वर्क में पीजी है। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल में पंजीकृत फार्मेसिस्ट है। ऐसे में न्यायालय के नियुक्ति पाने वाले को 10 में से नौ अंक और याचिकाकर्ता को मात्र चार अंक देने को भेदभावपूर्ण बताया है।
पढ़िए, कोर्ट ने की क्या टिप्पणी
न्यायाधीश सर्वेश कुमार गुप्ता की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने नियुक्ति के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को निर्देशित किया जाता है कि सीएमओ की एसीआर में प्रतिकूल प्रविष्टि की जाए।
अभिषेक पाठक की नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए, जबकि याचिककर्ता को पद पर ज्वाइन करने के निर्देश सीएमओ स्तर से जारी किये जाएं।
अगर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को हतोत्साहित करने के लिए यह मामला सही लगता है तो वे इसके लिए स्वतंत्र हैं कि अब तक अभिषेक पाठक को देय वेतन और अन्य वित्तीय लाभों को सीएमओ बागेश्वर के वेतन से वसूला जाए।