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कुर्सी की कश्मकश में उत्तराखंड सीएम ने पहाड़ से मोड़ा मुंह
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 30 Jan 2014 10:12 AM IST
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मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने एक बार फिर पहाड़ की पीड़ा से मुंह मोड़ लिया है। यह दूसरा मौका है जब मुख्यमंत्री बहुगुणा प्रदेश में जमीनी दौरे की बात कहकर पलट गए हैं।
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आपदा ग्रस्त लोगों में जगाई थी आस
मुख्यमंत्री ने 22 जनवरी को कहा था कि वे 28 जनवरी के बाद गढ़वाल-कुमाऊं का सड़क मार्ग से दौरा कर धरातल पर कामकाज देखेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उन लोगों के बीच आस जगाई थी जो आपदा के बाद बदली परिस्थितियों में जीवन से संघर्ष कर रहे हैं।
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उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री आएंगे तो अपने दुख-दर्द उनसे बांटेंगे, लेकिन एक बार फिर मुख्यमंत्री ने देहरादून में बैठकर लोगों की समस्याओं को फाइलों के माध्यम से निपटाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी फरवरी 2013 में सीएम ने अपना पहाड़ दौरा रद्द कर दिया था।
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जमीनी दौरे के संबंध में जब मुख्यमंत्री से पूछा गया तो तपाक से बोले आप वकील को नहीं फंसा सकते, वकील नहीं फंसता है। मुझे याद है 28 के बाद कहा था 29, 30, 31 भी हो सकती है।
फिर बोले, पंचायत चुनाव के लिए आचार संहिता लगनी है लिहाजा काम को गति देनी है फाइलें निपटानी हैं। उसके बाद फिर तो घूमना ही है। हालांकि, ये हो सकता है कि मुख्यमंत्री एक सप्ताह बाद अचानक अधिक व्यस्त हो गए हों लेकिन धरातल पर उतरने का बयान उन्हीं का था।
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पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी महीनों से चल रही है इसलिए आचार संहिता की बात भी प्रदेश के लोगों को हजम नहीं होगी।
जमीनी हकीकत या सैरसपाटा
मुख्यमंत्री के तब के बयान को देखें तो वह पहाड़ के लोगों की दुख तकलीफ और जमीनी हकीकत जानने की बात कह रहे थे। अब तारीखों में न पड़ने की बात कह मुख्यमंत्री का कहना है कि घूमना ही है फिर घूमते रहेंगे। एक सप्ताह में ही जमीनी हकीकत जानने की बात सैरसपाटे की तरह हो गई।
मंत्रियों को भी जिले नहीं, सरकार की समीक्षा की चिंता
मुख्यमंत्री ने खुद के साथ सभी प्रभारी मंत्रियों को भी निर्देश दिए थे कि वह भी जिलों में जाकर समीक्षा बैठकें करें। हो सकता है कि मुख्यमंत्री का देहरादून में बैठकर अधिक कामकाज करने का तर्क ठीक भी हो।
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लेकिन ये भी सच्चाई है कि कांग्रेस के प्रभारी मंत्रियों में चार प्रमुख मंत्रियों को दिल्ली दौरों से फुर्सत नहीं है। उनकी चिंता शायद जिले की समस्याओं से अधिक सरकार की समीक्षा में है।