सीएम रावत ने एक बार फिर भाजपा को किया चारों खाने चित
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आखिरकार सीएम रावत ने तमाम राजनीतिक, कूटनीतिक दांवपेंच आजमाते हुए एक बार फिर ‘फ्लोर टेस्ट’ पास कर लिया है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री रावत ने न सिर्फ विनियोग विधेयक पारित कराकर फ्लोर टेस्ट पास कर लिया है बल्कि अपनी सियासी चालों से विपक्षी भाजपा को चारों खाने चित भी कर दिया है।
सीएम रावत ने विधानसभाध्यक्ष, उपाध्यक्ष को लेकर विपक्षी भाजपा की ओर से लाए प्रस्ताव को न सिर्फ बहुमत से गिरा दिया बल्कि यह संदेश देने में भी सफल रहे कि उनकी सियासी चालों की कोई काट नहीं है।
भाजपा को यह कतई उम्मीद नहीं थी कि सदन शुरू होते ही विधानसभाध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पीठासीन अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप देंगे। अध्यक्ष के इस फैसले से तो भाजपा विधायक एकबारगी भौचक रह गए। लेकिन, बाद में उन्होंने मोर्चा खोल दिया।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट समेत सभी भाजपा विधायकों के सदन से बाहर चले जाने के बाद सीएम ने न सिर्फ विनियोग विधेयक पर मुहर लगवा ली बल्कि कई अन्य विधेयकों को पारित करा लिया। यह बात और है कि सीएम ने यह सब कुछ विपक्षी भाजपा की गैरमौजूदगी में किया।
सीएम ने मंत्रियों, विधायकों को दी थी एक सख्त हिदायत
सदन में दो घंटे तक चले हाई वोल्टेज सियासी ड्रामे के दौरान सत्ता पक्ष के मंत्रियों, विधायकों की चुप्पी भी सीएम रावत की एक कूटनीति का हिस्सा रही। सूत्रों की माने तो सीएम रावत ने विधायक मंडल दल की बैठक में मंत्रियों, विधायकों को इस बात की सख्त हिदायत दे दी थी कि कोई सदन में कुछ नहीं बोलेगा।
उनकी इस हिदायत का मंत्रियों, विधायकों पर असर भी दिखा। सीएम रावत ने न सिर्फ अकेले मोर्चा संभाला बल्कि सदन में वह सब कुछ करवाने में सफल रहे जिसकी उन्होंने योजना तैयार की थी। विनियोग विधेयक सदन में पारित हो या नहीं? इसे लेकर लंबे समय से तरह तरह के कयास लगाए जा रहे थे। बजट को भी फ्लोर टेस्ट से जोड़कर देखा जा रहा था। जितनी आसानी से सीएम रावत ने विनियोग विधेयक समेत कई विधेयकों को पारित करा लिया इसकी तो उम्मीद भी नहीं थी।