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रावत ने मोदी से कहा, कुछ दिन गुजारें उत्तराखंड में

Wed, 10 Sep 2014 09:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 10 Sep 2014 09:57 AM IST
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cm harish rawat invite naredndra modi to visit uttarakhand.

उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड आने और कुछ दिन गुजारने का निमंत्रण दिया है। सीएम ने उन्हें केदारनाथ धाम आने के लिए आमंत्रित किया है। उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी आपदा के तुरंत बाद केदारनाथ जाना चाहते थे लेकिन तत्कालीन बहुगुणा सरकार ने उन्हें रोक दिया था।

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मुख्यमंत्री ने लखवाड़ पावर प्रोजेक्ट में संबंधित विभाग से इनवेस्टमेंट क्लीयरेंस देने पर त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा की। सीएम ने पूर्व में लिए गए ग्रीन बोनस के फैसले पर अग्रिम कार्यवाही का अनुरोध किया।
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साथ वन प्रक्रिया का सरलीकरण एवं एक समय सीमा के अन्तर्गत त्वरित निष्पादन की व्यवस्था का भी अनुरोध किया।

छूट तीन वर्षों के लिए बढ़ाई जाए

cm harish rawat invite naredndra modi to visit uttarakhand.

सीएम ने बताया कि आपदाग्रस्त हो जाने के परिणामस्वरूप भारत सरकार ने राज्य को कई करों में छूट दी थी जिसे अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाया जाए।

सीएम ने भारत-नेपाल सीमा पर काली नदी के किनारे टनकपुर से जौलजीबी तक सड़क निर्माण को प्राथमिकता देने व जनपद पिथौरागढ़ की दारमा घाटी में तवाधाट से दुग्तू होते हुए मलारी तक सड़क मार्ग के निर्माण की पहल करने का भी अनुरोध किया।

गैरसैंण में सचिवालय परिसर, विधान भवन के साथ अन्य सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, बेस हॉस्पिटल एवं गैरसैंण को विभिन्न क्षेत्रों से सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए सौ किलोमीटर सड़क निर्माण को भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाना है।

सीएम ने बताया अवैध खनन पर अंकुश लगा है

cm harish rawat invite naredndra modi to visit uttarakhand.

सीएम ने पीएम को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समस्त खनन प्रक्रिया खुली प्रतिस्पर्धी निविदा के आधार पर हो रही हैं। जिससे राजस्व में काफी वृद्धि हुई है।

उन्होंने उदाहरण दिया कि दाबका नदी में सामान्यता 4 करोड़ राजस्व मिलता था जो करीब दस गुना बढ़कर 44 करोड़ हो गया है। राज्य सरकार के विभाग अब खनन सीधे तौर पर करने के बजाए खनन को नियमों पर ध्यान देंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य की सीमा में स्थित विभिन्न नदियों में प्रत्येक वर्ष रेता-बजरी एवं पत्थर, आदि आते हैं जिससे नदियों की तलहटी के स्तर बढ़ जाता है और बाढ़ आने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने पीएम से अनुरोध किया कि उत्तराखंड की समस्त नदियों में चुगान की प्रक्रिया को एफसीए से मुक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो मार्गदर्षक सिद्वांत दिये गए हैं उसके अंतर्गत चुगान की अनुमति राज्य स्तरीय समिति को दी जाए।

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