बड़ा हादसा: उत्तराखंड में दो जगह बादल फटने से मची तबाही, मकान बहा
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चकराता तहसील अंतर्गत लाखामंडल क्षेत्र के गाता और छुल्टाड़ गांव से सटे जंगल में बादल फटने से खड्ड उफना गए। जिसने इन गांव में भारी तबाही मचाई।
खड्ड से पेयजल लाइनों के साथ ही कई बीघा कृषि भूमि तेज बहाव में बह गई। कई खेतों में मलबा भी भर गया। पीड़ित ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
बृहस्पतिवार को क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली। झमाझम बारिश के चलते गुत्तू, मोठी, कांडोई और नावरी खड्ड उफन गए। उफनाए खड्ड के चलते गाता गांव में विजय चौहान की दो बीघा में लगाई गई सेब और अखरोटी की नर्सरी पूरी तरह से बर्बाद हो गई।
जिसमें लगे 35000 पौधें बर्बाद हो गई। विजय चौहान ने बताया कि उनकी नर्सरी खड्ड से करीब 10 मीटर ऊपर स्थित थी। बताया कि खड्ड की चपेट में आने से कई ग्रामीणों की कृषि भूमि को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
खड़ा हुआ पानी का संकट
वहीं पड़ोस के गांव छुल्टाड़ में भी उफनाए खड्ड ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव और मलबे से गांव की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। जिससे 40 परिवारों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। तेज बहाव में पानी के दो टैंक भी बह गए।
मदीराम, गोपालू, लाल सिंह, मायाराम, आमा देवी, सूपा रावत, किशोरी लाल, नंदा लाल, अरविंद, प्रताप समेत कई ग्रामीणों के खेत बह गए। जिनमें टमाटर, सेब, अखरोट के पौध लगे थे।
छुल्टाड़ की प्रधान मुन्नी देवी, समाजिक कार्यकर्ता रमेश सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में खड्ड का कभी भी इतना जलस्तर नहीं देखा। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं दूर जंगल में बादल फटने के चलते इतनी तबाही हुई।
मलबे के चलते गोराघाटी-मानथात मोटर मार्ग का 50 मीटर हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मलबा आने से करीब 30 गांव की आवाजाही ठप हो गई है। भाजपा जनजातीय मोर्चा के प्रदेश महामंत्री गीताराम गौड़ ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र होने के कारण क्षति की पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है।
उन्होंने इससे कई गुना अधिक नुकसान होने की आशंका जताते हुए तहसील प्रशासन से मौके पर टीम भेजने की मांग की है। तहसीलदार कुंवर सिंह नेगी ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र होने के कारण पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। शुक्रवार को क्षेत्र में राजस्व कर्मियों की टीम भेजी जाएगी।
चौखुटिया में मकान और ढाबा ध्वस्त
ग्राम पंचायत बिजरानी के जंगल में बादल फटने के बाद नाला उफान पर आ गया। इससे मोहन सिंह का मकान, गोशाला और शौचालय के साथ ही दो बैल भी बह गए। लीलाधर जोशी का ढाबा भी बह गया।
तहसीलदार ओमवीर सिंह ने बादल फटने के पुष्टि करते हुए बताया कि स्वैप के तहत बनी पेयजल योजना ध्वस्त हो गई है। चौखुटिया-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया है।