उमा भारती के बयान से धार्मिक जगत में भूचाल
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गंगा की स्वच्छता के लिए शवों व राख आदि के प्रवाह को रोकने संबंधी केंद्रीय मंत्री उमा भारती के बयान से धार्मिक जगत सख्त नाराज है।
संतों और पुरोहितों ने कहा कि गंगा तट पर अस्थि प्रवाह या पुष्प प्रवाह रोकने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उमा भारती यदि गंगा के प्रति वचनबद्ध है, तो उन्हें पहले औद्योगिक व अन्य प्रदूषण बंद कराना चाहिए।
धार्मिक जगत में इस बात पर नाराजगी जताई है कि उमा भारती गंगा नदी के तट पर स्थित श्मशान घाटों पर शव न जलाने की बात कह रही हैं।
यहां तक की कर्मकांड के बाद गंगा में प्रवाहित किए जाने वाले पुष्प, पिंड आदि से भी प्रदूषण होने की बात कर रही हैं। धार्मिक नेताओं ने उमा भारती को याद दिलाते हुए चेतावनी दी कि वह खुद संत जगत से हैं।
पहले भू-समाधि के लिए दें भूमि
कुर्सी मिलते ही यदि उनके विचार बदल गए हैं, तो धार्मिक जगत इसे स्वीकार नहीं करेगा। उनको चाहिए कि गंदे नाले, उद्योगों के जहरीले जल, कचरा, गंदे वस्त्र आदि गंगा में फेंकने से रोकें।
उमा भारती के इस बायान पर अखाड़ा परिषद के महामंत्री ने कहा है कि दुख का विषय है कि उमा भारती ने परंपराओं को रोकने की बात कही है। संत जगत लंबे अरसे से मांग करता आया है कि यदि सभी तीर्थों पर भू समाधि के लिए भूमि उपलब्ध करा दी जाए, तो शवों की जल समाधि रोक दी जाएगी।
उमा भारती खनन आदि पर प्रतिबंध लगाने की बजाय गंगा को पुष्प चढ़ाने से अपवित्र होना बता रही हैं।
अनादि काल से चला आ रहा है शवदाह
धर्म जगत से जुड़ी उमा भारती ने गंगा को पवित्र करने के लिए धार्मिक परंपराओं को ही रोकने के बयान दे डाले। देश के अधिकतर श्मशान घाट गंगा और अन्य पवित्र नदियों के किनारे हैं। यहां शवदाह अनादि काल से होता आ रहा है। राख बहाने से गंगा में कोई प्रदूषण नहीं होता। पहले गंदे नाले बंद किए जाएं।
- वीरेंद्र कीर्तिपाल, प्रांतीय संयोजक, विश्व हिंदू परिषद
अस्थि प्रवाह को ही गंगा का आगमन
उमा भारती को यह पता होना चाहिए कि धरती पर गंगा का आगमन सगर पुत्रों की राख बहाने के लिए हुआ था। वह अब कर्मकांड और अस्थि प्रवाह पर ही प्रतिबंध लगाने को कह रही हैं। देशभर का तीर्थ पुरोहित समाज इसका विरोध करेगा। यदि वे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करेंगी, तो उन्हें परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
- वीरेंद्र श्रीकुंज, महामंत्री, गंगा सभा