भारतीय सीमा पर 'ड्रैगन' ने फिर उठाया सिर, लोगों को खदेड़ा
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उत्तराखंड के चमोली जिले से लगी चीन सीमा पर चीनी सैनिकों ने भारतीय चरवाहों को खदेड़कर निचले क्षेत्रों में भेज दिया है।
चीनी सैनिकों ने चरवाहों की खाद्य सामग्री को बर्बाद करने की नियत से चीनी, नमक, चावल, आटा, मिर्च, मसाला और नमक को मिक्स कर दिया। इससे चरवाहों के सामने राशन का संकट खड़ा हो गया है।
भारतीय सीमा में पहुंचे करीब 20 चीनी याकों को भी सीमा पर पहरा दे रही भारतीय सेना ने चीन की ओर खदेड़ दिया है। चीन सीमा की रैकी कर लौटी टीम ने ताजा हालातों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी है। 24 जुलाई को रैकी के लिए निकली टीम 29 जुलाई को लौट आई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन की टीम मलारी से आगे सुमना तक वाहन से और आगे सीमा क्षेत्र बाड़ाहोती तक रैकी के लिए पैदल ही निकली। टीम को सीमा क्षेत्र में होतीगाड़ के पास जगह-जगह मेड इन चाइना लिखे रैपर भी पड़े मिले।
बाड़ाहोती पर भी ड्रैगन की नजर
सीमा क्षेत्र में इन दिनों अपनी बकरियों को चराने के लिए पहुंचे भारतीय चरवाहों ने टीम को अपनी आपबीती सुनाई। जोशीमठ के एक चरवाहे ने बताया कि बीती 16 जून को सीमा क्षेत्र बाड़ाहोती के समीप चीन की ओर से तीन चीनी सैनिक हथियार के साथ उनके पास पहुंचे और अपनी भाषा में उन्हें सीमा क्षेत्र से चले जाने के लिए कहा।
जब उन्होंने भारतीय क्षेत्र में होने की बात कही तो तीनों सैनिकों ने गुस्से में टेंट में रखा उनका राशन एक साथ मिला दिया। हालांकि उन्होंने टेंट के साथ कोई छेडख़ानी नहीं की। भारतीय सीमा में पहुंचे करीब 20 चीनी याकों को भी भारतीय सेना ने सीमा पार खदेड़ दिया।
भारत-तिब्बर व्यापार के दौरान वर्ष 1959 में चीन ने उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी हरकत शुरु कर दी थी। भारत और तिब्बत व्यापार की सबसे बड़ी मंडी बाड़ाहोती को भी चीन अपनी सीमा बताने का हमेशा प्रयास करता है।
हालांकि इस क्षेत्र पर भारत का कब्जा है। 10 किमी से अधिक भू-भाग में फैले बाड़ाहोती बुग्याल से होते ही होतीगाड़ भी बहती है। इस सीमा क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल मुस्तैद है।
प्रशासन की टीम सामान्य भ्रमण पर सीमा क्षेत्र तक गई थी, लेकिन अंतिम सीमा क्षेत्र बाड़ाहोती में मौसम खराब होने के चलते टीम को लौटना पड़ा। टीम बाड़ाहोती के इर्द-गिर्द तक पहुंची थी। सीमा क्षेत्र में चीनी सैनिकों के किसी भी प्रकार की गतिविधि की कोई सूचना नहीं मिली है।
- अशोक कुमार, डीएम, चमोली